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गुफा में रहने वाली रूसी महिला की बेटियों के पिता आए सामने, साझा कस्टडी की जताई इच्छा

BY: Yoganand Shrivastva

कर्नाटक के गोकर्ण में गुफा में अपनी दो बेटियों के साथ पाई गई रूसी महिला के मामले में अब एक बड़ा मोड़ आया है। इजरायली नागरिक डॉर गोल्डस्टीन ने खुद को उन बच्चियों का पिता बताते हुए कहा है कि वे अपनी बेटियों के पास रहना चाहते हैं। उन्होंने साझा कस्टडी (Joint Custody) की मांग करते हुए कहा, “मैं सिर्फ एक पिता की तरह उनके करीब रहना चाहता हूं।”


आध्यात्मिक जीवन की चाह में गुफा तक पहुंची महिला

40 वर्षीय नीना कुटीना, जो कि मूल रूप से रूस की निवासी हैं, पिछले 8 वर्षों से भारत में रह रही थीं। वे हिंदू संस्कृति और अध्यात्म से अत्यधिक प्रभावित थीं। इसी वजह से उन्होंने गोवा के रास्ते गोकर्ण की रामतीर्थ पहाड़ियों में शरण ली और वहीं की एक गुफा में अपनी दो बेटियों के साथ जीवन व्यतीत कर रही थीं। नीना ने बताया कि उनकी बेटियां प्रेया (6 वर्ष) और अमा (4 वर्ष) हैं, जिनका जन्म प्राकृतिक माहौल में ही हुआ।


गुफा में साधना और ध्यान

नीना ने गुफा में एक छोटी सी जगह को अपना घर बना लिया था, जहाँ उन्होंने रुद्र प्रतिमा स्थापित कर रखी थी और दिनभर पूजा-पाठ व ध्यान करती थीं। वे किसी बाहरी संपर्क में नहीं थीं और बच्चों को भी जंगल की प्रकृति के बीच खुद ही पाल रही थीं।


कैसे सामने आया मामला?

हाल ही में गोकर्ण क्षेत्र में हुए भूस्खलन के बाद गश्ती कर रही पुलिस टीम ने एक गुफा के बाहर कपड़े लटके हुए देखे। जब टीम ने गुफा के अंदर जाकर देखा, तो वहां नीना अपने दोनों बच्चों के साथ पाई गईं। इस घटना ने प्रशासन और लोगों को चौंका दिया।


वीजा 2017 में ही समाप्त, फिर भी रह रहीं थीं भारत में

जांच में सामने आया कि नीना का वीजा 2017 में ही खत्म हो चुका था, लेकिन उसके बाद भी वे भारत में ही रहीं। उन्होंने बताया कि वह कई देशों में घूमकर भारत लौटी थीं और आध्यात्मिक जीवन को ही जीने का प्रयास कर रही थीं।


सामने आए बेटियों के इजरायली पिता

नीना के बयान के अनुसार, बेटियों के पिता एक इजरायली बिजनेसमैन हैं। बाद में उनकी पहचान डॉर गोल्डस्टीन के रूप में हुई, जो भारत में बिजनेस वीजा पर हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे नीना से अलग हैं लेकिन बेटियों की परवरिश में सहभागी बनना चाहते हैं।


निर्वासन की प्रक्रिया शुरू

पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने नीना को गोकर्ण से बेंगलुरु के एक साध्वी के आश्रम में स्थानांतरित कर दिया है। वहीं, रूसी दूतावास से संपर्क कर उन्हें निर्वासित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। फिलहाल महिला और बच्चों को सुरक्षित रखा गया है और उनकी मानसिक व शारीरिक स्थिति का मूल्यांकन किया जा रहा है।

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