Report by: Ramphool Meena
Fake Land Registry: जयपुर ग्रामीण के जमवारामगढ़ से बड़ी खबर है। राहोरी प्रकरण में सात नामजद भू-माफिया के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बावजूद अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। मामला दर्ज होने के एक महीने बाद भी जांच अधिकारी ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया है। पुलिस की कार्यवाही पर सवाल उठ रहे हैं। पीड़ित पक्ष अब इस मामले को लेकर सीधे राजस्थान के मुख्यमंत्री से मिलने की तैयारी कर रहा है।
Fake Land Registry: फर्जी दस्तावेज़ों से जमीन रजिस्ट्री का मामला
जमवारामगढ़ थाने में जांच अधिकारी राजेंद्र मीणा, एएसआई, इस मामले की जांच कर रहे हैं। हालांकि अभी तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। प्रार्थी और पीड़ित पक्ष ने जयपुर ग्रामीण एसपी, स्थानीय विधायक महेंद्र पाल मीणा, थाना अधिकारी, उपखंड अधिकारी और तहसीलदार समेत दर्जनों प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर लगाने के बाद भी राहत नहीं पाई है।
Fake Land Registry: 10 दिन में हुई एक हैक्टेयर से अधिक जमीन की रजिस्ट्री

जमवारामगढ़ ग्राम राहौरी में एक हैक्टेयर से अधिक जमीन की रजिस्ट्री मात्र 10-11 दिन में हुई थी। जांच में फर्जी दस्तावेजों का उपयोग होने का आरोप सामने आया है। न्यायालय के आदेश पर तत्कालीन तहसीलदार, पटवारी, क्रेता, दो विक्रेता और दो गवाहों सहित सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।
मृतक व्यक्ति के नाम पर रजिस्ट्री
प्रार्थी प्रहलाद शर्मा ने बताया कि जिस व्यक्ति के नाम पर फर्जी दस्तावेज पेश कर रजिस्ट्री करवाई गई, उसकी मृत्यु 50 वर्ष पहले हो चुकी थी। साथ ही जमीन पर रहन दर्ज था, जिसे काश्त रहनदार परिवार चला रहा था। आरोप है कि रहन हटाने और रजिस्ट्री में कूटरचित आधार कार्ड का उपयोग किया गया।
Fake Land Registry: अधिकारियों का विरोध और जानकारी से इनकार
राहौरी प्रशासक बादाम देवी शर्मा ने बताया कि संबंधित व्यक्ति गांव में निवास नहीं करता था। वहीं, सेवानिवृत्त तहसीलदार शिवदयाल शर्मा ने बिना सुनवाई रहन हटाना नियम विरुद्ध बताया। वर्तमान तहसीलदार रामधन विश्नोई ने कहा कि यह घटनाक्रम तत्कालीन तहसीलदार के समय का है और उनके पास इस मामले की कोई जानकारी नहीं है।
read also: Child Death Case: भानुप्रतापपुर में डेढ़ साल की मासूम की मौत





