,

50,000 रुपये का न्यूनतम बीमा! ईडीएलआई योजना में हुए ये 3 बड़े बदलाव, आप भी जान लें

ईपीएफओ

ईडीएलआई योजना कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) का हिस्सा है और एक सामाजिक सुरक्षा लाभ के रूप में कार्य करती है। यह योजना उन ईपीएफ सदस्यों के आश्रितों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जिनकी असमय मृत्यु नौकरी के दौरान हो जाती है।

संक्षेप में

  • ईपीएफओ ने ईडीएलआई योजना में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं।
  • न्यूनतम बीमा लाभ 50,000 रुपये निर्धारित किया गया है।
  • गैर-योगदान अवधि के बाद भी लाभ देने का प्रावधान किया गया है।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने अपनी 237वीं केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) बैठक में कर्मचारी जमा संबद्ध बीमा (ईडीएलआई) योजना में अहम बदलावों की घोषणा की। इन संशोधनों का उद्देश्य उन कर्मचारियों के परिवारों को बेहतर वित्तीय सहायता प्रदान करना है, जिनकी मृत्यु नौकरी के दौरान हो जाती है।

ईपीएफओ

ईडीएलआई क्या है?

ईडीएलआई योजना कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) का एक हिस्सा है और सामाजिक सुरक्षा के रूप में कार्य करती है। यह योजना उन ईपीएफ सदस्यों के परिवारों को आर्थिक मदद देती है, जिनकी मृत्यु कार्यरत रहते हुए हो जाती है।

ईडीएलआई योजना में 3 प्रमुख बदलाव

  1. न्यूनतम बीमा लाभ: नए नियम के अनुसार, यदि किसी कर्मचारी की मृत्यु नौकरी के पहले वर्ष में हो जाती है, तो उनके परिवार को कम से कम 50,000 रुपये की बीमा राशि मिलेगी।
    ईपीएफओ के प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया, “यदि कोई ईपीएफ सदस्य एक साल की निरंतर सेवा पूरी किए बिना मर जाता है, तो उनके परिवार को न्यूनतम 50,000 रुपये का जीवन बीमा लाभ मिलेगा। इस बदलाव से हर साल 5,000 से अधिक मृत्यु मामलों में बेहतर लाभ मिलने की उम्मीद है।”
  2. गैर-योगदान अवधि के बाद भी लाभ: पहले, यदि किसी ईपीएफ सदस्य की मृत्यु से पहले गैर-योगदान अवधि (जब वे ईपीएफ में योगदान नहीं दे रहे थे) होती थी, तो उनके परिवार को मृत्यु लाभ से वंचित होना पड़ सकता था। अब नए नियम के तहत ऐसे मामलों में भी लाभ मिलेगा।
    ईपीएफओ ने कहा, “अब यदि किसी सदस्य की अंतिम योगदान राशि प्राप्त होने के छह महीने के भीतर मृत्यु हो जाती है और उनका नाम कंपनी के रिकॉर्ड से हटाया नहीं गया है, तो ईडीएलआई लाभ स्वीकार्य होगा।”
  3. सेवा निरंतरता पर विचार: पहले, नौकरी बदलते समय सप्ताहांत या छुट्टी जैसा छोटा अंतराल भी परिवारों को मृत्यु लाभ से वंचित कर सकता था। एक साल की निरंतर सेवा की शर्त पूरी न होने पर न्यूनतम 2.5 लाख और अधिकतम 7 लाख रुपये का लाभ नहीं मिलता था।
    ईपीएफओ ने बताया, “नए बदलावों के तहत, दो नौकरियों के बीच अधिकतम दो महीने का अंतर अब निरंतर सेवा माना जाएगा। इससे हर साल 1,000 से अधिक मृत्यु मामलों को बेहतर ईडीएलआई लाभ मिलेगा।”

मेरा संन्यास…-रोहित शर्मा’ Retirement पर क्या बोले ‘Hitman’, सभी हैरान

Yogi Adityanath Kanya Pujan: गोरखनाथ मंदिर में सीएम योगी ने किया कन्या पूजन

Report: Vandna Rawat Yogi Adityanath Kanya Pujan गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर में…

Roopi Soren: स्व. रूपी सोरेन के श्राद्धकर्म में शामिल हुए बन्ना गुप्ता

Roopi Soren झारखंड के पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता स्वर्गीय रूपी सोरेन के…