BY
Yoganand Shrivastava
Dharamshala : अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा सार्वजनिक किए गए ‘जेफरी एपस्टीन’ के दस्तावेजों (Epstein Files) में तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा का उल्लेख होने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। फाइलों में नाम आने से मचे हड़कंप के बीच, दलाई लामा के आधिकारिक कार्यालय ने रविवार को एक विस्तृत प्रेस वक्तव्य जारी कर इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
169 बार उल्लेख पर सफाई: “कभी नहीं हुई कोई मुलाकात”
Dharamshala अमेरिकी दस्तावेजों में दलाई लामा के नाम का लगभग 169 बार जिक्र होने की रिपोर्ट सामने आई थी, जिसके बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं। इस पर सफाई देते हुए दलाई लामा के कार्यालय ने स्पष्ट किया कि “हिज होलिनेस” (His Holiness) ने अपने जीवन में कभी भी जेफरी एपस्टीन से मुलाकात नहीं की है। बयान में यह भी जोर देकर कहा गया कि उन्होंने कभी किसी प्रतिनिधि को भी एपस्टीन से संपर्क करने या किसी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अधिकृत नहीं किया था।

सोशल मीडिया पर वायरल दावों का खंडन
Dharamshala दलाई लामा के आधिकारिक ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से जारी नोट में इन मीडिया रिपोर्ट्स को भ्रामक और सत्य से परे बताया गया है। कार्यालय के अनुसार, 2012 के किसी कार्यक्रम के संदर्भ में ईमेल्स में नाम का उल्लेख होना मात्र एक तकनीकी विवरण हो सकता है, लेकिन इसका किसी भी प्रकार के प्रत्यक्ष संबंध या संलिप्तता से कोई लेना-देना नहीं है। धर्मशाला स्थित उनके मुख्यालय ने स्पष्ट किया कि दलाई लामा का जीवन अहिंसा और करुणा के सिद्धांतों पर आधारित है और ऐसी भ्रामक खबरें केवल भ्रम फैलाने का प्रयास हैं।
विशेषज्ञों की राय: नाम होने का अर्थ ‘दोषी’ होना नहीं
Dharamshala कानूनी विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि एपस्टीन फाइल्स में कई वैश्विक हस्तियों के नाम केवल संदर्भ या उल्लेख (Mention) के तौर पर शामिल हैं। किसी फाइल में नाम होने का अर्थ यह कतई नहीं है कि संबंधित व्यक्ति किसी गलत गतिविधि में शामिल रहा है या उसके वित्तीय लेन-देन एपस्टीन के साथ थे। दलाई लामा के अनुयायियों और विशेषज्ञों ने इसे एक ‘प्रोपेगेंडा’ करार देते हुए कहा है कि बिना किसी ठोस सबूत, फोटो या वित्तीय रिकॉर्ड के लगाए जा रहे ये आरोप टिकने वाले नहीं हैं।





