रिपोर्ट: उपेंद्र कुमावत
Dhar निसरपुर । सरदार सरोवर बांध की डूब से प्रभावित धार जिले के सुप्रसिद्ध और प्राचीन तीर्थ कोटेश्वर से आस्था को चोट पहुँचाने वाली खबर सामने आई है। शुक्रवार (13 फरवरी 2026) की सुबह अज्ञात शरारती तत्वों ने मंदिर में स्थापित राधा-कृष्ण की मूर्तियों को क्षतिग्रस्त कर दिया। इस घटना ने एक बार फिर डूब प्रभावित क्षेत्रों में स्थित देवस्थानों की सुरक्षा और प्रशासन की अनदेखी को उजागर कर दिया है।

मंदिर पहुंचे पुजारी ने देखा खंडित स्वरूप, पुलिस जांच में जुटी
Dhar घटना का खुलासा शुक्रवार सुबह उस समय हुआ जब मंदिर के पुजारी आयुष सोनी प्रतिदिन की तरह नाव के जरिए पूजन-आरती के लिए कोटेश्वर पहुंचे। मंदिर के भीतर भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी की मूर्तियों को क्षतिग्रस्त हालत में देख उनके होश उड़ गए। उन्होंने तत्काल निसरपुर पुलिस चौकी और स्थानीय ग्रामीणों को इसकी सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने साक्ष्य जुटाकर अज्ञात आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। उल्लेखनीय है कि कुछ माह पूर्व भी इसी घाट से मां नर्मदा की अति प्राचीन मूर्ति चोरी हो गई थी, जिसका अब तक सुराग नहीं लग सका है।

डूब की मार और पुनर्वास के अभाव में अस्तित्व खोता तीर्थ
Dhar कोटेश्वर तीर्थ की वर्तमान स्थिति अत्यंत दयनीय है। गुजरात में बने सरदार सरोवर बांध के कारण यह प्राचीन स्थल साल दर साल डूब की मार झेल रहा है। लहरों के थपेड़ों और आवागमन बाधित होने के चलते यहाँ के घाट खंडहर में तब्दील हो चुके हैं और प्राचीन मंदिर जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं। नर्मदा घाटी विकास विभाग (NVDA) और शासन द्वारा तीर्थ के विस्थापन या संरक्षण को लेकर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं, जिसके कारण यहाँ असामाजिक तत्वों का जमावड़ा बढ़ने लगा है।

आठ साल बीते, पर मंदिरों के संरक्षण की सुध लेने वाला कोई नहीं
Dhar सरदार सरोवर बांध की पूर्ण डूब को लगभग 8 साल बीत चुके हैं, लेकिन नर्मदा किनारे स्थित इन ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन उदासीन बना हुआ है। श्रद्धालुओं और स्थानीय पुजारियों का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द ही इन प्राचीन मंदिरों के संरक्षण और सुरक्षित विस्थापन का निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले समय में ये तीर्थ पूरी तरह समाप्त हो जाएंगे। मूर्तियों के साथ हो रही छेड़छाड़ से श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं और क्षेत्र में तनाव व्याप्त है।





