BY: Yoganand Shrivastva
Dehli news: भारतीय जनता पार्टी ने लंबे इंतजार के बाद रविवार, 14 दिसंबर को अपने नए कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम की घोषणा कर दी। पार्टी ने नितिन नबीन को यह अहम जिम्मेदारी सौंपी है। वे अब जगत प्रकाश नड्डा के स्थान पर संगठन की कमान संभालेंगे। हालांकि, उन्हें अभी पूर्णकालिक नहीं बल्कि कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है, जिससे स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति में और समय लग सकता है।
नड्डा को क्यों मिलता रहा विस्तार
जगत प्रकाश नड्डा जनवरी 2020 में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे। उनका कार्यकाल वर्ष 2023 में समाप्त हो गया था, लेकिन लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए उन्हें लगातार विस्तार दिया जाता रहा। पार्टी नेतृत्व का तर्क था कि चुनावी माहौल और संगठनात्मक चुनाव पूरे न होने के कारण नए अध्यक्ष का चयन टालना पड़ा।
दो वर्षों से अधिक समय तक विस्तार, पहली बार
भारतीय जनता पार्टी के इतिहास में यह पहली बार हुआ जब किसी राष्ट्रीय अध्यक्ष को दो साल से अधिक समय तक कार्यकाल विस्तार दिया गया। कई प्रदेशों में संगठनात्मक चुनाव पूरे न होने के कारण राष्ट्रीय अध्यक्ष का औपचारिक चुनाव नहीं हो सका।
उत्तर प्रदेश से जुड़ा राजनीतिक संकेत
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब उत्तर प्रदेश में भी पार्टी ने नए प्रदेश अध्यक्ष का ऐलान किया है। महाराजगंज लोकसभा क्षेत्र से सात बार सांसद रहे पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। कुर्मी समाज से आने वाले पंकज चौधरी के जरिए पार्टी ने सामाजिक संतुलन साधने का प्रयास किया है।
नितिन नबीन का राजनीतिक परिचय
नितिन नबीन वर्तमान में बिहार सरकार में मंत्री हैं। वे पूर्व विधायक नबीन किशोर सिन्हा के पुत्र हैं और बांकीपुर विधानसभा सीट से लगातार पांच बार विधायक चुने जा चुके हैं। वे कायस्थ समाज से आते हैं और संगठन में उनका लंबा अनुभव रहा है। इससे पहले वे छत्तीसगढ़ में पार्टी के प्रभारी की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं।
पार्टी संविधान क्या कहता है
पार्टी के संविधान के अनुसार राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यकाल तीन वर्षों का होता है। इस आधार पर वर्ष 2023 में ही नया अध्यक्ष चुना जाना था, लेकिन परिस्थितियों के कारण यह प्रक्रिया टलती रही। फिलहाल नितिन नबीन को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर संगठन को सक्रिय नेतृत्व देने का प्रयास किया गया है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव कैसे होता है
राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव एक निर्वाचक मंडल करता है, जिसमें राष्ट्रीय परिषद और प्रदेश परिषदों के सदस्य शामिल होते हैं।
- कम से कम 20 सदस्य संयुक्त रूप से किसी एक नाम का प्रस्ताव रख सकते हैं।
- यह प्रस्ताव कम से कम 5 प्रदेश परिषदों से आना अनिवार्य होता है।
- वही व्यक्ति इस पद के लिए पात्र होता है, जो कम से कम 15 वर्षों से पार्टी का सदस्य हो।





