BY: Yoganand Shrivastva
दिल्ली : लाल किले के सामने हुई कार विस्फोट की जांच में डॉ. उमर-उन-नबी का नाम मुख्य संदिग्ध के रूप में सामने आ रहा है। जांच एजेंसियों को शक है कि ब्लास्ट के समय वही कार चला रहा था। फिलहाल घटनास्थल से मिली लाश का डीएनए सैंपल लिया गया है, जिसे उमर के परिवार से लिए गए सैंपल से मिलाया जा रहा है ताकि यह पुष्टि की जा सके कि कार में मौजूद व्यक्ति वही था या नहीं।
मेडिकल कॉलेज से निकाला गया था
सूत्रों के अनुसार, उमर-उन-नबी को दो वर्ष पहले जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग सरकारी मेडिकल कॉलेज से नौकरी से हटा दिया गया था। कॉलेज प्रशासन के अनुसार, एक मरीज की मौत उसकी लापरवाही के कारण हुई थी। उस समय कॉलेज के जनरल मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. ग़ुलाम जीलानी रोमशू ने बताया कि उमर का व्यवहार अनुशासनहीन था। साथी डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और मरीजों ने कई बार उसके खिलाफ शिकायतें की थीं।
डॉ. रोमशू के अनुसार, एक गंभीर मरीज की हालत बिगड़ने पर उमर अपनी ड्यूटी से नदारद था। एक जूनियर डॉक्टर ने इलाज की कोशिश की, लेकिन मरीज बच नहीं सका। घटना की जांच के लिए चार वरिष्ठ चिकित्सकों की समिति बनाई गई, जिसमें डॉ. मोहम्मद इक़बाल, डॉ. मुमताज़-उद-दीन वानी और डॉ. संजीत सिंह रिसम भी शामिल थे। जांच में यह साबित हुआ कि उमर ने झूठ बोला और उस दिन अस्पताल में मौजूद नहीं था। इसके बाद उसे पद से हटा दिया गया।
अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़ाव
नौकरी से निकाले जाने के बाद उमर ने हरियाणा की अल फलाह यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ मेडिकल साइंस में काम शुरू किया। बाद में इसी यूनिवर्सिटी परिसर से विस्फोटक सामग्री का बड़ा जखीरा बरामद किया गया। जांच में सामने आया कि कुछ डॉक्टर आतंकी मॉड्यूल से जुड़े हुए थे।
आतंकी नेटवर्क से संबंधों की आशंका
सूत्रों का कहना है कि उमर-उन-नबी ने दो अन्य डॉक्टरों—डॉ. अदील राथर और डॉ. मुज़म्मिल गनैया—के साथ मिलकर एक आतंकी मॉड्यूल बनाया था। दोनों गिरफ्तार किए जा चुके हैं। एजेंसियों को शक है कि इस नेटवर्क में कई डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ जुड़े हुए थे, जो अपने पेशे का इस्तेमाल विस्फोटक बनाने में करते थे। 9 नवंबर को 2,900 किलो अमोनियम नाइट्रेट बरामद होने के बाद उमर फरार हो गया था।
उसने सभी मोबाइल फोन बंद कर दिए थे और यूनिवर्सिटी की ड्यूटी छोड़ दी थी। अनुमान है कि वह हरियाणा के धौज गांव के पास छिपा हुआ था। एजेंसियों का मानना है कि फरारी के दौरान वह बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर गया था।
कार की गतिविधियां
जांच में पता चला है कि उमर की i-20 कार, जिसमें ब्लास्ट हुआ, वह लगभग 11 दिनों तक अल फलाह यूनिवर्सिटी कैंपस में खड़ी रही थी। 10 नवंबर को उसने कार वहां से निकाली और दिल्ली की ओर रवाना हुआ। सीसीटीवी फुटेज में उसकी कार बदरपुर, कनॉट प्लेस और मयूर विहार इलाकों में दिखाई दी थी।
कार को बाद में लाल किले के पास स्थित पार्किंग में खड़ा किया गया। कुछ घंटे बाद, कार लाल किले के सामने पहुंची और वहीं विस्फोट हो गया। एजेंसियों का मानना है कि उमर उस वक्त कार में मौजूद था और विस्फोट के पीछे वही मुख्य साजिशकर्ता है।
यह पूरा मामला न केवल आतंकी गतिविधियों में शिक्षित युवाओं की संलिप्तता को उजागर करता है, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है कि आतंक अब नई रणनीतियों के साथ शिक्षा संस्थानों तक पहुँच चुका है।





