By: Yoganand Shrivastva
Dehli news: विजय दिवस के अवसर पर युद्ध और देश की सुरक्षा को लेकर एक अहम सवाल फिर सामने आया है कि यदि कभी युद्ध की स्थिति बने, तो उसमें आम नागरिकों की क्या भूमिका होगी। इस विषय पर सीमा सुरक्षा बल के पूर्व उप महानिरीक्षक नरेंद्र नाथ धर दुबे ने विस्तार से अपनी बात रखी।
उन्होंने कहा कि युद्ध केवल सीमाओं पर ही नहीं लड़ा जाता, बल्कि समाज के हर हिस्से में उसका असर और योगदान जुड़ा होता है। देश का हर नागरिक, चाहे वह वर्दी में हो या नहीं, अपने-अपने स्तर पर राष्ट्र की मजबूती में भागीदार होता है।
पूर्व अधिकारी ने रामसेतु निर्माण का उदाहरण देते हुए बताया कि जैसे गिलहरी ने अपनी क्षमता के अनुसार योगदान दिया था, वैसे ही युद्ध के समय आम नागरिक भी छोटे-छोटे प्रयासों से बड़ी भूमिका निभा सकता है। आत्मबल और सहयोग, दोनों ही किसी भी संघर्ष में सबसे बड़ी ताकत होते हैं।
उन्होंने कहा कि युद्ध के दौरान देश में व्यवस्था बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। नागरिकों की जिम्मेदारी होती है कि सामाजिक व्यवस्था सुचारु रूप से चलती रहे। परिवहन, बाजार, शिक्षा, चिकित्सा सेवाएं, रक्तदान, भोजन और आवश्यक संसाधनों की आपूर्ति लगातार बनी रहनी चाहिए।
इसके साथ ही संचार व्यवस्था, सड़कों, रेल मार्गों और अन्य बुनियादी ढांचे का संचालन भी नागरिकों के सहयोग से ही संभव है। ये सभी क्षेत्र ऐसे हैं, जहां आम लोग सीधे तौर पर देश की रक्षा में योगदान दे सकते हैं।
पूर्व बीएसएफ अधिकारी ने स्पष्ट कहा कि नागरिक समाज के सहयोग के बिना कोई भी युद्ध नहीं जीता जा सकता। इतिहास इस बात का साक्षी है कि सेना की सफलता के पीछे आम जनता का समर्थन और अनुशासन सबसे बड़ा आधार होता है।
उन्होंने अंत में कहा कि जिन लोगों के लिए युद्ध लड़ा जाता है, यदि वही समाज एकजुट होकर सहयोग करे, तो देश को हर चुनौती से पार पाया जा सकता है। यही सच्ची देशभक्ति और विजय का मार्ग है।





