आउटसोर्सिंग कर्मियों की आपराधिक गतिविधियों से चिंतित कोयला कंपनियां

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Coal companies concerned over criminal activities of outsourcing workers

रिपोर्ट- रूपेश सोनी

हजारीबाग एसपी ने वेरिफिकेशन का दिया निर्देश

हजारीबाग (झारखंड): कोयला उद्योग जहां हजारीबाग जिले में रोजगार का बड़ा जरिया बना है, वहीं आउटसोर्सिंग कंपनियों से जुड़े कर्मियों की आपराधिक गतिविधियों ने पुलिस और कंपनियों दोनों को चिंता में डाल दिया है। हाल के दिनों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें कंपनियों में काम करने वाले ही गंभीर अपराधों में शामिल पाए गए।

पुलिस ने किया अनिवार्य वेरिफिकेशन का आग्रह

हजारीबाग एसपी अंजनी अंजन ने जिले में कार्यरत सभी कोयला कंपनियों से अपील की है कि वे आउटसोर्सिंग कर्मियों की नियुक्ति से पहले अनिवार्य रूप से पुलिस वेरिफिकेशन कराएं।
एसपी का कहना है कि—

“बिना जांच-पड़ताल के भर्ती किए गए कर्मचारी अक्सर अपराध में लिप्त पाए जाते हैं, जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित होती है। कंपनियों को भी इस जिम्मेदारी को गंभीरता से लेना होगा।”

हालिया घटनाओं ने बढ़ाई चिंता

पिछले दिनों पुलिस ने सीसीएल की एक आउटसोर्सिंग कंपनी के वाहनों में आगजनी की घटना का खुलासा किया था। इस मामले में सात अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। जांच में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि इस घटना का मास्टरमाइंड इमदाद रजा उसी कंपनी में चालक के रूप में कार्यरत था।

ऐसे मामलों ने न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था पर खतरा बढ़ा दिया है, बल्कि कोयला कंपनियों की साख पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

युवाओं की संलिप्तता से समाज चिंतित

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरफ्तार आरोपियों में ज्यादातर की उम्र बेहद कम है। पहली बार अपराध की दुनिया में कदम रखने वाले ये युवा सीधे जेल की सलाखों के पीछे पहुंच रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि—

  • यह प्रवृत्ति समाज के लिए चिंता का विषय है।
  • अभिभावकों को युवाओं पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
  • सही मार्गदर्शन और निगरानी से युवा भटकने से बच सकते हैं।

आगे की चुनौती

कोयला कंपनियों के लिए आउटसोर्सिंग कर्मियों की नियुक्ति अब सिर्फ रोजगार से जुड़ा मामला नहीं रह गया, बल्कि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की चुनौती बन गया है। पुलिस का मानना है कि कंपनियां अगर वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को सख्ती से लागू करें, तो अपराध पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।

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