पूर्व विधायक दुर्गा सोरेन की पुण्यतिथि पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन ने दी श्रद्धांजलि, कहा – “उनके विचार आज भी हमारी राजनीति की प्रेरणा हैं”

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रिपोर्टर, राजू सिंह, अपडेट योगानंद श्रीवास्तव

रांची/नामकुम: झारखंड के निर्माण और जनजातीय अधिकारों की लड़ाई में अहम भूमिका निभाने वाले झारखंड आंदोलन के प्रखर योद्धा और पूर्व विधायक स्व. दुर्गा सोरेन की पुण्यतिथि पर आज झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन और विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

मुख्यमंत्री और विधायक आज नामकुम (लोवाडीह) स्थित दुर्गा सोरेन स्मारक स्थल पर पहुंचे, जहां उन्होंने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर कई झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में आमजन भी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस दौरान कहा,

“दुर्गा दा केवल एक जननेता नहीं थे, बल्कि वे झारखंड आंदोलन की आत्मा थे। उनका जीवन आदिवासी अस्मिता, सामाजिक न्याय और संघर्ष का प्रतीक रहा है। उनकी सोच और विचारधारा आज भी हमारे लिए मार्गदर्शक हैं।”

विधायक कल्पना सोरेन ने भी श्रद्धांजलि देते हुए कहा,

“दुर्गा दा के अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प हम सभी ने लिया है। वे झारखंड की आत्मा में बसे हुए हैं।”

दुर्गा सोरेन: एक प्रेरणादायक संघर्षशील जीवन

स्वर्गीय दुर्गा सोरेन, झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक और झारखंड के पहले मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के पुत्र थे। वे एक साहसी, दूरदर्शी और सामाजिक सरोकारों से जुड़े नेता थे। दुर्गा सोरेन ने अपने राजनीतिक जीवन में हमेशा जनजातीय समाज, गरीब और वंचित वर्ग की आवाज़ को बुलंदी से उठाया।

  • नाम: दुर्गा सोरेन
  • जन्म: 1969 (अनुमानित), झारखंड
  • पिता: शिबू सोरेन (पूर्व केंद्रीय मंत्री और झारखंड के मुख्यमंत्री)
  • राजनीतिक दल: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM)
  • पद: पूर्व विधायक
  • विशेष योगदान: झारखंड अलग राज्य आंदोलन में सक्रिय भागीदारी, आदिवासी हकों की रक्षा
  • निधन: 2009

वे एक कुशल संगठनकर्ता और जमीनी नेता के रूप में जाने जाते थे। जनसभाओं में उनकी साफ-सुथरी और दमदार भाषण शैली लोगों को गहराई से प्रभावित करती थी। उन्होंने युवाओं और ग्रामीणों के बीच जन-जागरूकता फैलाने का कार्य किया और झारखंडी पहचान की रक्षा के लिए अंतिम समय तक संघर्ष किया।

उनका निधन वर्ष 2009 में हुआ, लेकिन उनके विचार, संघर्ष और योगदान आज भी जीवंत हैं। दुर्गा सोरेन को याद करना, झारखंड की आत्मा को समझना है।

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