Report: Dinesh nagwanshi
Chhindwara छिंदवाड़ा जिले के तामिया क्षेत्र में एक 12 साल की स्कूली छात्रा ने अदम्य साहस का परिचय दिया है। सातवीं कक्षा में पढ़ने वाली कपूरी भारती जब अपने घर से स्कूल के लिए निकली, तो घने जंगल के रास्ते में उसका सामना एक-दो नहीं, बल्कि पांच तेंदुओं (2 वयस्क और 3 शावक) से हो गया। इस खौफनाक मंजर को देखकर बड़े-बड़ों के पसीने छूट जाते, लेकिन इस बहादुर बेटी ने अपनी जान की परवाह न करते हुए समाज की सुरक्षा को प्राथमिकता दी।

Chhindwara सूझबूझ ने टाली बड़ी अनहोनी, वन विभाग को मिला शिकार
Chhindwara 20 जनवरी की सुबह, कपूरी जब कुआंखूटी से कुआंबादला स्कूल जा रही थी, तब रास्ते में महज 30-40 मीटर की दूरी पर तेंदुए खड़े थे। कपूरी घबराने के बजाय कुछ देर चुपचाप खड़ी रही। जैसे ही तेंदुए जंगल की ओर मुड़े, कपूरी घर वापस भागने के बजाय 3 किलोमीटर लंबा खतरनाक रास्ता पार कर स्कूल पहुंची। उसने तुरंत अपने प्रधानपाठक कोमलप्रसाद कोरी को जानकारी दी। इस सूचना के बाद जब वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, तो वहां एक गाय का शिकार मिला। समय रहते मिली जानकारी के कारण वन विभाग ने क्षेत्र में मुनादी कराकर लोगों को अलर्ट कर दिया, जिससे संभावित जनहानि टल गई।
राज्यपाल ने दी शाबाशी, प्रशासन ने बनाया ‘बाल वन प्रहरी’
Chhindwara तामिया प्रवास पर पहुंचे मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने जब इस नन्ही वीरांगना की कहानी सुनी, तो उन्होंने कपूरी को सम्मानित कर उसकी वीरता को सलाम किया। वन विभाग ने कपूरी की इस निडरता और जिम्मेदारी की भावना को देखते हुए उसे ‘बाल वन प्रहरी’ की उपाधि से नवाजा है। समाजसेवी नितिन दत्ता के अनुसार, कपूरी की समझदारी इस बात में थी कि उसने वापस घर जाने के बजाय स्कूल पहुंचना जरूरी समझा, ताकि अधिकारी समय पर अलर्ट हो सकें।
जंगल के रास्तों पर बहादुरी की नई मिसाल
कपूरी भारती की यह कहानी केवल एक हादसे से बचने की नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की है। स्थानीय ग्रामीणों और स्कूल स्टाफ के बीच कपूरी अब एक ‘हीरो’ बन चुकी है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कपूरी ने न केवल अपनी जान बचाई, बल्कि वन्यजीवों की मौजूदगी की समय पर जानकारी देकर पूरे इलाके को एक बड़े खतरे से सुरक्षित कर लिया।
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