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Bokaro : विस्थापितों के हक में चंपई सोरेन ने फूंका बिगुल; 60 साल बाद जमीन वापसी के लिए अब होगा बड़ा आंदोलन

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Bokaro

Report: Sanjeev kumar

Bokaro बोकारो स्टील प्लांट (BSL) के निर्माण के दौरान विस्थापित हुए हजारों परिवारों को न्याय दिलाने के लिए झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। चंपई सोरेन ने इसे एक विशाल जन आंदोलन बनाने की शुरुआत करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब विस्थापित अपनी जमीन पर अधिकार लेकर रहेंगे।

Bokaro बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर किया आगाज

गुरुवार को बोकारो पहुँचने पर चंपई सोरेन ने नया मोड़ स्थित भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर आंदोलन का औपचारिक शंखनाद किया। इस दौरान भारी संख्या में विस्थापित परिवार और भाजपा नेताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। चंपई सोरेन ने कहा कि यह लड़ाई किसी दल की नहीं, बल्कि उन विस्थापितों की है जिन्होंने अपनी जमीन तो दी, लेकिन उन्हें बदले में केवल उपेक्षा मिली।

Bokaro “खाली पड़ी जमीनों पर अब विस्थापित जोतेंगे हल”

पूर्व मुख्यमंत्री ने आंदोलन की रूपरेखा साझा करते हुए एक बेहद क्रांतिकारी कदम की घोषणा की। उन्होंने कहा:

“बोकारो स्टील प्लांट के पास लाखों एकड़ ऐसी जमीन है जो 60 साल बीत जाने के बाद भी खाली पड़ी है। भूमि अधिग्रहण के नियमों के अनुसार, यदि 5 साल तक जमीन का उपयोग नहीं होता है, तो उसे मूल मालिकों को लौटा दिया जाना चाहिए। अब विस्थापित एकजुट होकर इन खाली जमीनों पर हल जोतने का काम करेंगे।”

Bokaro सरकार और व्यवस्था पर साधा निशाना

चंपई सोरेन ने राज्य सरकार और प्लांट प्रबंधन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि बोकारो की धरती ने कई बड़े नेताओं को पहचान दी, लेकिन विस्थापितों के प्रति किसी ने अपनी जवाबदेही नहीं निभाई। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह आंदोलन विस्थापितों के बैनर तले ही चलेगा और वही इसकी अगुवाई करेंगे, जबकि वह स्वयं इसका नेतृत्व करते हुए उन्हें न्याय दिलाएंगे।

Bokaro प्रमुख मांगें और भविष्य की रणनीति

आंदोलनकारियों का मुख्य तर्क है कि दशकों पहले ली गई जमीनों का आज तक पूरा उपयोग नहीं हुआ है। विस्थापितों की मांग है कि:

  • खाली पड़ी अतिरिक्त जमीन वापस की जाए।
  • विस्थापित परिवारों को स्थायी रोजगार सुनिश्चित हो।
  • क्षेत्र के विकास में विस्थापितों की समान भागीदारी हो।

आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और उग्र बनाने के लिए जल्द ही विस्थापितों के साथ मिलकर एक व्यापक रणनीति तैयार की जाएगी। इस घोषणा के बाद बोकारो स्टील प्रबंधन और जिला प्रशासन की धड़कनें बढ़ गई हैं।

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