संवाददाता :सुरेश भाटी
Bulandshahr : उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में परिवहन विभाग और एक निजी ड्राइविंग स्कूल के गठजोड़ से फर्जीवाड़े का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी तंत्र की शुचिता पर कालिख पोत दी है। मेरठ मंडल के उप परिवहन आयुक्त से मान्यता प्राप्त एक ड्राइविंग स्कूल ने एक ऐसे व्यक्ति को 10 दिनों की ट्रेनिंग देकर सर्टिफिकेट जारी कर दिया, जिसकी मृत्यु घटना से कई महीने पहले ही हो चुकी थी।
मौत के 5 महीने बाद ‘मुर्दे’ ने ली ड्राइविंग ट्रेनिंग
Bulandshahr मामला स्याना क्षेत्र के राजा मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल का है। इस स्कूल ने शेखुपुर रौरा निवासी सुखवीर के नाम पर एक प्रमाण पत्र जारी किया, जिसमें दावा किया गया कि सुखवीर ने 1 अगस्त से 10 अगस्त 2025 तक ई-रिक्शा चलाने का प्रशिक्षण लिया है। सर्टिफिकेट जारी करने वाले इमरान ने बाकायदा लिखित में यह प्रमाणित किया कि वह सुखवीर की ड्राइविंग स्किल्स और शारीरिक फिटनेस से पूरी तरह संतुष्ट है। लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि सुखवीर की 1 मार्च 2025 को एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी और 21 अप्रैल को उसका मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी हो चुका था।

RTO कार्यालय की कार्यप्रणाली पर खड़े हुए गंभीर सवाल
Bulandshahr यह फर्जीवाड़ा केवल एक निजी स्कूल तक सीमित नहीं है। सबसे बड़ा सवाल RTO (ट्रेनिंग) मेरठ के उन अधिकारियों पर उठता है, जिन्होंने बिना किसी भौतिक सत्यापन के इस फर्जी सर्टिफिकेट पर अपने ‘काउंटर साइन’ कर दिए। कागजों पर एक मृत व्यक्ति को न केवल सड़क पर ई-रिक्शा चलाते हुए दिखाया गया, बल्कि उसे शारीरिक रूप से फिट भी घोषित कर दिया गया। यह घटना दर्शाती है कि परिवहन विभाग के भीतर बिना जांच-परख के प्रमाणपत्रों की बंदरबांट किस कदर हावी है।

एआरटीओ का नोटिस और प्रशासनिक कार्रवाई
Bulandshahr मामला तूल पकड़ते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया है। ARTO बुलंदशहर ने आनन-फानन में संबंधित ड्राइविंग स्कूल के प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अधिकारियों का कहना है कि स्पष्टीकरण मिलने के बाद स्कूल की मान्यता रद्द करने और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। हालांकि, इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि रसूख और भ्रष्टाचार के मेल से कागजों पर मुर्दों को भी सड़क पर दौड़ाया जा सकता है।





