Report: NemiChand Banjare
गरियाबंद: प्राप्त एक पत्र में नक्सली संगठन के भीतर हथियारबंद संघर्ष बंद कर नागरिक स्तर पर जनआंदोलन करने का संदेश दिया गया है। पत्र में कहा गया है कि अब हथियार उठाने की परिस्थिति नहीं बची है और संगठन को जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं का राजनीतिक और सामाजिक हल ढूँढना चाहिए। पत्र, जो खुद को ‘उर्दंती एरिया कमेटी सुनील’ के नाम से जारी किया गया, में संपर्क नंबर और गुप्त कोड भी दिए गए हैं — इससे संकेत मिलता है कि संगठन के भीतर इस दिशा पर विचार-विमर्श चल रहा है।
पृष्ठभूमि — संगठन में असंतोष और आत्ममंथन
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि महाराष्ट्र में 16 अक्टूबर 2025 को हुए एनकाउंटर (जिसमें रिपोर्ट के अनुसार सोनू दादा व रूपेश दादा सहित साठ से अधिक नक्सली मारे गए) के बाद संगठन में असंतोष और आत्मपरीक्षण बढ़ा है। पत्र 17 अक्टूबर को बस्तर के एक अन्य अभियान का हवाला देते हुए कहता है कि वहां 210 से अधिक नक्सलियों के आत्मसमर्पण या संघर्षविराम की चर्चाएं हुईं — यही घटनाक्रम भी संगठन के आंतरिक विचार-विमर्श को प्रभावित कर रहा है।
आग्रह का सार — जनता के बीच जाकर काम करो
पत्र का मुख्य संदेश यही है कि अब हथियारबंद कार्रवाई के बजाय जनता के साथ जुड़कर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए आंदोलन करना ज्यादा प्रभावी होगा। इसे संगठन के अंदर हिंसा से वैचारिक/सामाजिक गतिविधियों की ओर झुकाव माना जा रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया
इन पत्रों व हालिया घटनाओं के बाद गरियाबंद और बस्तर जोन में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं और आवश्यक सतर्कता बरत रही हैं।






