BY: Yoganand Shrivastava
राजधानी दिल्ली की ठंडी होती शाम में अचानक एक जोरदार धमाके ने पूरे देश को हिला दिया — जगह थी, लाल किले का सामने वाला इलाका, जो आमतौर पर सैलानियों और स्थानीय लोगों से भरा रहता है। सोमवार की उस शाम जब कार में विस्फोट हुआ, किसी ने नहीं सोचा था कि यह कोई साधारण हादसा नहीं बल्कि एक बड़े फिदायीन हमले की कड़ी हो सकती है। जांच एजेंसियों के मुताबिक यह ब्लास्ट सीधे तौर पर हरियाणा के फरीदाबाद में सक्रिय आतंकी मॉड्यूल से जुड़ा हुआ है, जिसका खुलासा दो दिन पहले ही हुआ था। रविवार रात जम्मू-कश्मीर पुलिस ने फरीदाबाद से 300 किलो अमोनियम नाइट्रेट, असॉल्ट राइफल और भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया था। इस बरामदगी ने पहले ही सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए थे, लेकिन किसी ने यह नहीं सोचा था कि अगला निशाना दिल्ली का दिल यानी लाल किला होगा। जांच में सामने आया कि धमाके में जिस कार का इस्तेमाल हुआ — एक ग्रे रंग की हुंडई i20 — वह कार कई हाथों से गुजरते हुए आतंकी तारिक और उसके साथी डॉक्टर उमर मोहम्मद तक पहुंची थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, तारिक वही व्यक्ति है, जिसके ठिकाने से 2900 किलो आईईडी बनाने का सामान जब्त किया गया था। बताया जा रहा है कि उमर मोहम्मद, जो फरीदाबाद मॉड्यूल का फरार आतंकी है, वही इस कार में सवार था और सीसीटीवी फुटेज में मास्क पहने आगे बैठे व्यक्ति के रूप में उसकी शक्ल मिलती-जुलती पाई गई है। अब पुलिस कार में सवार मृतक व्यक्ति का डीएनए टेस्ट करवाकर इसकी पुष्टि करने में जुटी है कि क्या वह उमर ही था। सूत्र बताते हैं कि धमाके से पहले यह कार करीब तीन घंटे तक लाल किले के पास सुनहरी मस्जिद के सामने पार्किंग में खड़ी रही — दोपहर 3 बजकर 19 मिनट पर कार पार्किंग में दाखिल हुई और शाम 6 बजकर 48 मिनट पर निकली, ठीक कुछ मिनट बाद ही भयंकर विस्फोट हुआ। एजेंसियों का मानना है कि यह एक योजनाबद्ध फिदायीन हमला था, जिसमें विस्फोटक पहले से कार में लगाया गया था। पुलिस को यह भी पता चला है कि यह कार मूल रूप से मोहम्मद सलमान नाम के व्यक्ति की थी, जिसने इसे नदीम को बेचा, नदीम ने आगे फरीदाबाद स्थित रॉयल कार जोन नामक पुराने कार डीलर को बेच दी, और वहीं से यह कार तारिक के हाथों में आई। इस चेन ने पूरे नेटवर्क को उजागर कर दिया है। दिलचस्प बात यह है कि डॉक्टर उमर मोहम्मद के साथी डॉ. मुज़म्मिल की गिरफ्तारी के बाद से उमर काफी घबराया हुआ था और खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उसने जल्दबाजी में यह हमला करने का फैसला किया। जांच एजेंसियों को शक है कि यह हमला लाल किले जैसे प्रतीक स्थल को निशाना बनाकर भारत में डर और अस्थिरता फैलाने की कोशिश थी। धमाके के बाद मौके पर पहुंचे दिल्ली पुलिस और एनएसजी के बम स्क्वॉड ने घटनास्थल को घेर लिया और मौके से कई मेटल फ्रैगमेंट्स, वायरिंग के टुकड़े और जले हुए प्लास्टिक के हिस्से बरामद किए। बताया जा रहा है कि धमाके की तीव्रता इतनी थी कि आसपास खड़ी दो कारों के शीशे चटक गए और धुएं का गुबार दूर से दिखाई देने लगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले एक तेज सीटी जैसी आवाज आई और फिर जोरदार धमाका हुआ जिससे पूरी जमीन हिल गई। शुरुआती जांच के बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मामला दर्ज करते हुए आतंक विरोधी कानून UAPA की धारा 16 और 18 के तहत एफआईआर दर्ज की है, साथ ही विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 3 और 4 जोड़ी गई है। इसके अलावा हत्या और हत्या के प्रयास की धाराएं भी शामिल की गई हैं। अब एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फरीदाबाद मॉड्यूल के पीछे कौन-सी बड़ी आतंकी संगठन की फंडिंग थी और यह हमला केवल दिल्ली तक सीमित था या किसी बड़ी श्रृंखला का हिस्सा। सूत्रों का कहना है कि कार का रूट बदरपुर बॉर्डर से आखिरी बार सीसीटीवी में दिखाई दिया था, उसके बाद से लाल किले तक उसका सफर रहस्यमय है। जांच टीमें अब उस पूरे रास्ते की सीसीटीवी मैपिंग कर रही हैं ताकि पता लगाया जा सके कि कार बीच में कहां-कहां रुकी, किससे संपर्क हुआ और क्या किसी ने रिमोट से विस्फोटक को सक्रिय किया। सुरक्षा एजेंसियों ने इस घटना के बाद दिल्ली-एनसीआर में हाई अलर्ट जारी कर दिया है, बॉर्डरों पर नाकाबंदी कर दी गई है और हर संदिग्ध वाहन की जांच की जा रही है। यह भी कहा जा रहा है कि यह मॉड्यूल जम्मू-कश्मीर में बैठे पाकिस्तानी हैंडलर्स से सीधे निर्देश ले रहा था और देश की राजधानी में आतंकी गतिविधि को अंजाम देने की कोशिश कर रहा था। इस पूरे प्रकरण ने न सिर्फ दिल्ली पुलिस बल्कि केंद्र सरकार के सुरक्षा ढांचे को भी झकझोर कर रख दिया है। फिलहाल जांच एजेंसियां इस बात की तह में जाने में जुटी हैं कि यह हमला किसी बड़े नेटवर्क का ट्रेलर था या एक असफल मिशन जो समय से पहले फट गया। लेकिन एक बात अब साफ है — लाल किले के सामने हुआ यह धमाका केवल एक हादसा नहीं, बल्कि भारत की सुरक्षा पर सीधा हमला था, और इसके पीछे की साजिश जितनी गहरी है, उतनी ही खतरनाक भी।





