BY
Yoganand Shrivastava
सरकारी सिस्टम की गलती से बढ़ा विवाद
Bihar: बिहार के गया में वार्ड संख्या 34 की महिला पार्षद शीला देवी को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया, जिससे वह अपने विधवा पेंशन के लाभ से वंचित हो गईं। पार्षद शीला देवी ने बताया कि पति की मृत्यु के बाद वह विधवा पेंशन ले रही थीं, लेकिन अचानक पेंशन की राशि बैंक खाते में नहीं आई। जब उन्होंने KYC कराने प्रखंड कार्यालय पहुंचीं, तो पता चला कि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत बताया गया है।
खुद को जिंदा साबित करने का संघर्ष
Bihar शीला देवी अब खुद को जिंदा साबित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की लापरवाही सरकारी तंत्र की गंभीर कमी को दर्शाती है। उनके अनुसार, ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, जो बिना सत्यापन के लाभुकों को मृत घोषित कर देते हैं।
पेंशन लाभ का नुकसान और सरकारी लापरवाही
Bihar वार्ड पार्षद प्रतिनिधि ओम यादव ने बताया कि इस तरह की गलती से न केवल शीला देवी बल्कि अन्य कई लाभुक भी विधवा पेंशन और अन्य लाभ से वंचित हो सकते हैं। अधिकारी जांच और सत्यापन के बजाय फाइलों के आधार पर राशि रोक देते हैं, जिससे लाभुकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इस मामले में कई अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दी गई है, लेकिन अभी तक समाधान नहीं हुआ है।
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