,

भिंड: त्रयोदशी भोज में ब्राह्मणों को बुलाया तो यादव समाज ने किया बहिष्कार, इटावा की घटना से गुस्सा

BY: Yoganand Shrivastva

मध्यप्रदेश के भिंड जिले में एक यादव परिवार द्वारा त्रयोदशी भोज में ब्राह्मणों को आमंत्रित करने पर यादव समाज ने सामाजिक बहिष्कार का फैसला ले लिया। यह निर्णय उत्तर प्रदेश के इटावा में एक कथावाचक के साथ हुई मारपीट और अपमानजनक घटना के विरोध में लिया गया।

यूपी की घटना बनी बहिष्कार की वजह

21 जून को इटावा में भागवत कथा के दौरान जब लोगों को यह पता चला कि कथावाचक ब्राह्मण नहीं, बल्कि यादव हैं, तो विवाद खड़ा हो गया। कथावाचक के साथ मारपीट की गई, उनकी चोटी काट दी गई, सिर मुंडवा दिया गया और अपमान स्वरूप एक महिला के पैर में नाक रगड़वाई गई। इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद देशभर में इसका विरोध शुरू हो गया।

भिंड में यादव समाज का सख्त निर्णय

इस घटना के बाद भिंड के मौ कस्बे में यादव समाज ने पंचायत बुलाई और तय किया कि समाज के लोग अब किसी भी धार्मिक कर्मकांड के लिए ब्राह्मणों को आमंत्रित नहीं करेंगे। यदि कोई व्यक्ति यह नियम तोड़ता है, तो उसका सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा।

भोज में ब्राह्मणों को बुलाया तो हुआ विरोध

मौ कस्बा निवासी कमल यादव की मां रामदेवी का निधन 4 जुलाई को हुआ था। 16 जुलाई को त्रयोदशी भोज आयोजित किया गया, जिसमें उन्होंने कुल 13 ब्राह्मणों को आमंत्रित किया। इससे पहले 13 जुलाई को यादव समाज की पंचायत में यह तय हो चुका था कि समाज के युवाओं से ही धार्मिक कर्मकांड कराए जाएंगे। जब समाज को कमल यादव के भोज के बारे में पता चला, तो उन्होंने बहिष्कार का निर्णय लिया।

परिवार ने दी सफाई

कमल यादव ने कहा कि वे वर्षों से अपने कुल पुरोहितों से ही धार्मिक कार्य करवाते आए हैं और भोज की तैयारी पहले ही कर चुके थे। उन्हें पंचायत के निर्णय की जानकारी भोज से एक दिन पहले मिली थी। उनके बेटे ब्रजमोहन ने बताया कि कुछ लोगों ने आकर ब्राह्मणों को न बुलाने की सलाह दी, लेकिन भोज में मोहल्ले के अधिकांश लोग शामिल हुए।

पंचायत का पक्ष

पंचायत में मौजूद पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद यादव ने कहा कि ब्राह्मण समाज द्वारा पहले यादव कथावाचकों के अपमान के विरोध में यह सामूहिक निर्णय लिया गया है। कमल यादव को यह बात पहले ही समझाई गई थी, लेकिन उन्होंने समाज की भावना को नजरअंदाज किया।



सामाजिक टकराव और जातीय भावनाओं के चलते एक धार्मिक भोज का बहिष्कार किया गया, जो यह दिखाता है कि इटावा की घटना की गूंज देश के अन्य हिस्सों तक फैल गई है। ऐसी घटनाएं सामाजिक समरसता को चुनौती देती हैं और ज़रूरत इस बात की है कि संवाद और सम्मान से ही ऐसे विवादों का हल निकाला जाए।