Aaj Ka Panchang: 18 अक्टूबर 2026, रविवार को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि के बाद अष्टमी तिथि शुरू होगी। हिंदू पंचांग के अनुसार, तिथि, नक्षत्र, योग और करण की जानकारी के साथ दिन के शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय जानना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। रविवार को पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान या अन्य शुभ कार्यों की योजना बना रहे लोग पंचांग के आधार पर समय का चयन कर सकते हैं। यहां जानिए रविवार का पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय। नीचे दिए गए समय नई दिल्ली के स्थानीय समय पर आधारित हैं।
Aaj Ka Panchang: तिथि और नक्षत्र की जानकारी
रविवार, 18 अक्टूबर को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि सुबह लगभग 8:28 बजे तक रहने के बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी। शारदीय नवरात्र के दौरान अष्टमी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु अपनी परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान कर सकते हैं।
नक्षत्र की बात करें तो पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र दोपहर लगभग 12:49 बजे तक रहेगा। इसके बाद उत्तराषाढ़ा नक्षत्र शुरू होगा। पंचांग में योग के रूप में सुकर्मा का उल्लेख है। वहीं, करण में पहले वणिज और उसके बाद विष्टि करण रहेगा। चंद्रमा की राशि धनु बताई गई है।
Aaj Ka Panchang: पंचांग के प्रमुख विवरण
रविवार के पंचांग के प्रमुख विवरण इस प्रकार हैं:
| पंचांग का विवरण | जानकारी |
|---|---|
| दिन | रविवार |
| मास | आश्विन |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
| तिथि | सप्तमी सुबह 8:28 बजे तक, इसके बाद अष्टमी |
| नक्षत्र | पूर्वाषाढ़ा दोपहर 12:49 बजे तक, इसके बाद उत्तराषाढ़ा |
| योग | सुकर्मा |
| करण | वणिज, इसके बाद विष्टि |
| चंद्र राशि | धनु |
| विक्रम संवत | 2083 |
| शक संवत | 1948 |
पंचांग में इन जानकारियों का उपयोग धार्मिक कार्यों और पारंपरिक अनुष्ठानों के लिए समय निर्धारित करने में किया जाता है। हालांकि, अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और स्थानीय गणनाओं के कारण कुछ समय में अंतर हो सकता है।
Aaj Ka Panchang: पूजा-पाठ के लिए शुभ मुहूर्त
हिंदू धर्म में शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है। कई लोग दिन की शुरुआत पूजा-पाठ, ध्यान और धार्मिक गतिविधियों से करते हैं। रविवार को नई दिल्ली के लिए बताए गए प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं:
| शुभ मुहूर्त | समय |
|---|---|
| ब्रह्म मुहूर्त | सुबह 4:43 से 5:33 बजे तक |
| अभिजीत मुहूर्त | सुबह 11:43 से दोपहर 12:29 बजे तक |
| विजय मुहूर्त | दोपहर 2:00 से 2:46 बजे तक |
| गोधूलि मुहूर्त | शाम 5:48 से 6:13 बजे तक |
ब्रह्म मुहूर्त को ध्यान, साधना और पूजा-पाठ के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। अभिजीत मुहूर्त को भी पारंपरिक मान्यताओं में शुभ समय के रूप में देखा जाता है। वहीं, विजय मुहूर्त और गोधूलि मुहूर्त का उपयोग भी धार्मिक परंपराओं के अनुसार किया जाता है। किसी विशेष पूजा या संस्कार के लिए मुहूर्त तय करने से पहले स्थानीय पंचांग देखना उचित रहेगा।
Aaj Ka Panchang: रविवार को राहुकाल का समय
पंचांग के अनुसार, रविवार को राहुकाल का समय शाम 4:23 बजे से 5:48 बजे तक बताया गया है। हिंदू ज्योतिषीय मान्यताओं में राहुकाल को ऐसा समय माना जाता है, जिसमें नए शुभ कार्यों की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है।
यदि आप रविवार को कोई महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान, नया काम या शुभ गतिविधि शुरू करने की योजना बना रहे हैं, तो अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि कर सकते हैं। राहुकाल की गणना स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पर निर्भर करती है, इसलिए अलग-अलग स्थानों पर इसका समय बदल सकता है।
Aaj Ka Panchang: सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रमा का समय
रविवार के पंचांग में सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय भी महत्वपूर्ण जानकारी माना जाता है। नई दिल्ली के लिए दिए गए समय इस प्रकार हैं:
- सूर्योदय: सुबह 6:23 बजे
- सूर्यास्त: शाम 5:48 बजे
- चंद्रोदय: दोपहर 1:10 बजे
- चंद्रास्त: रात 11:27 बजे
सूर्योदय और सूर्यास्त के समय के आधार पर दिन की अवधि तथा कुछ पारंपरिक मुहूर्तों की गणना की जाती है। इसी तरह, चंद्रमा के उदय और अस्त होने का समय भी पंचांग में दर्ज किया जाता है। धार्मिक कार्यों या व्रत से जुड़ी समय-सारणी बनाते समय इन विवरणों को ध्यान में रखा जा सकता है।
Aaj Ka Panchang: पंचांग देखते समय इन बातों का रखें ध्यान
पंचांग के समय और शुभ मुहूर्त शहर के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। इसका प्रमुख कारण अलग-अलग स्थानों पर सूर्योदय, सूर्यास्त और स्थानीय समय की गणना में अंतर होना है। इसलिए नई दिल्ली के लिए दिए गए समय को दूसरे शहरों में बिना पुष्टि किए लागू नहीं करना चाहिए।
यदि आप पूजा-पाठ, व्रत, धार्मिक अनुष्ठान या किसी शुभ कार्य की योजना बना रहे हैं, तो अपने शहर के पंचांग से तिथि, नक्षत्र और मुहूर्त की जानकारी जरूर जांच लें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार समय का चयन करने के साथ-साथ अपनी पारिवारिक परंपराओं का भी ध्यान रखें।


