भारत बंद 2025: देशव्यापी हड़ताल का असर बिहार में गहराया, ट्रेनें रोकी गईं, बैंकिंग और डाक सेवाएं ठप

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भारत बंद 2025: देशव्यापी हड़ताल का असर बिहार में गहराया, ट्रेनें रोकी गईं, बैंकिंग और डाक सेवाएं ठप

देशभर में आज, 9 जुलाई 2025, एक बार फिर जनआंदोलन का रूप ले चुका ‘भारत बंद’ देखने को मिल रहा है। यह बंद केवल एक हड़ताल नहीं, बल्कि सरकार की मजदूर, किसान और राष्ट्र-विरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुटता का प्रतीक बन गया है।

क्यों बुलाया गया है भारत बंद?

इस बंद का आह्वान देश के 10 केंद्रीय श्रमिक संगठनों और उनकी सहयोगी इकाइयों ने किया है। इसके पीछे मुख्य कारण हैं:

  • सरकार की निजीकरण और आउटसोर्सिंग नीतियों का विरोध
  • श्रमिक अधिकारों में कटौती
  • युवाओं को रोजगार के बजाय सेवानिवृत्त कर्मियों की पुनर्नियुक्ति
  • मजदूरी में गिरावट और बढ़ती महंगाई

किन सेवाओं पर दिखा बंद का असर?

आज की हड़ताल में देशभर के लगभग 25 करोड़ कर्मचारी हिस्सा ले रहे हैं। इससे कई महत्वपूर्ण सेवाएं ठप हो गई हैं, जैसे:

बंद सेवाएं:

  • बैंक और बीमा सेवाएं
  • कोयला खनन और फैक्ट्रियों का उत्पादन
  • राज्य परिवहन और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां
  • डाक सेवाएं
  • सरकारी दफ्तरों की कार्यप्रणाली

चालू सेवाएं:

  • स्कूल और कॉलेज
  • प्राइवेट ऑफिस
  • ट्रेनें, हालांकि कुछ स्थानों पर आंशिक रूप से बाधित

बिहार में राजनीतिक बंद: ट्रेनें रोकी गईं

बिहार में भारत बंद का असर ज्यादा गहरा है क्योंकि यहां वोटर लिस्ट रिवीजन (SIR) के खिलाफ महागठबंधन ने बंद का समर्थन किया है। राजद, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के आह्वान पर कई स्थानों पर ट्रेनें रोकी गईं और सड़कों पर विरोध प्रदर्शन किए गए।


क्या कहती हैं ट्रेड यूनियनें?

ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) की महासचिव अमरजीत कौर के मुताबिक:

  • 25 करोड़ से ज्यादा कर्मचारी हड़ताल में भाग ले रहे हैं
  • किसान और कृषि श्रमिक संगठनों का भी समर्थन
  • NMDC, इस्पात कंपनियों, राज्य सरकार विभागों के कर्मचारी भी शामिल

श्रमिक संगठनों की प्रमुख शिकायतें

श्रमिक संगठन पिछले लंबे समय से सरकार से संवाद की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी 17 सूत्रीय मांगों पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। उनकी प्रमुख शिकायतें:

  • पिछले 10 सालों से राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन आयोजित नहीं किया गया
  • नई श्रम संहिताएं श्रमिक अधिकारों को कमजोर करती हैं
  • हड़ताल और सामूहिक सौदेबाजी जैसे अधिकारों को खत्म करने की कोशिश
  • बेरोजगारी, महंगाई और मजदूरी में गिरावट

क्या पहले भी हुए हैं ऐसे बंद?

  • नवंबर 2020, मार्च 2022 और फरवरी 2024 में भी इसी तरह की देशव्यापी हड़तालें हो चुकी हैं
  • यह सिर्फ प्रदर्शन नहीं, बल्कि नीतिगत विरोध का प्रतीक है

क्या है आज के भारत बंद का संदेश?

भारत बंद 2025 एक स्पष्ट संकेत है कि जनता, श्रमिक और किसान सरकार की नीतियों से नाराज हैं। यह विरोध सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं बल्कि नीति-निर्माण की प्रक्रिया में आम आदमी की भागीदारी की मांग करता है। बिहार में इसके तीखे असर और पूरे देश में सेवाओं के ठहराव ने सरकार के लिए चेतावनी की घंटी बजा दी है।