Bangladesh Politics 2026: बांग्लादेश में आज से नई राजनीतिक शुरुआत होने जा रही है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के चेयरमैन और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के उत्तराधिकारी तारिक रहमान देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले हैं। हाल ही में संपन्न आम चुनाव में उनकी पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद 60 वर्षीय रहमान सरकार की कमान संभालेंगे।
Bangladesh Politics 2026: परंपरा से हटकर होगा शपथ ग्रहण
इस बार शपथ ग्रहण समारोह पारंपरिक स्थल ‘बंगभवन’ की बजाय संसद परिसर के साउथ प्लाजा में आयोजित किया जाएगा। लंबे समय से राष्ट्रपति भवन में शपथ दिलाने की परंपरा रही है, लेकिन इस बार आयोजन स्थल बदला गया है। राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन दोपहर में मंत्रिपरिषद के सदस्यों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे।
Bangladesh Politics 2026: दिनभर का कार्यक्रम: सुबह सांसदों की शपथ, शाम को कैबिनेट
सूत्रों के अनुसार सुबह 10 बजे नवनिर्वाचित सांसदों का शपथ ग्रहण होगा। इसके बाद सुबह 11:30 बजे बीएनपी की संसदीय दल की बैठक में नेता का चयन किया जाएगा। मुख्य कैबिनेट का शपथ ग्रहण समारोह शाम 4 बजे शुरू होगा।
Bangladesh Politics 2026: भारत की ओर से ओम बिरला होंगे शामिल

शपथ ग्रहण समारोह में कई देशों के प्रतिनिधियों और अंतरराष्ट्रीय हस्तियों की मौजूदगी की संभावना है। भारत की तरफ से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला प्रतिनिधित्व करेंगे। उनके साथ विदेश सचिव विक्रम मिस्री और लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह के भी उपस्थित रहने की संभावना है।
Bangladesh Politics 2026: चुनाव परिणाम और राजनीतिक पृष्ठभूमि
अगस्त 2024 में शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता का दौर शुरू हुआ था। 12 फरवरी को हुए 13वें संसदीय चुनाव में 59.44 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। अवामी लीग को इस चुनाव में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं मिली थी।
297 सीटों वाली संसद में बीएनपी ने 209 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि जमात-ए-इस्लामी को 68 सीटें मिलीं।
Bangladesh Politics 2026: 1991 के बाद पहले पुरुष प्रधानमंत्री
तारिक रहमान 1991 के बाद बांग्लादेश के पहले पुरुष प्रधानमंत्री होंगे। पिछले तीन दशकों में देश की सत्ता मुख्य रूप से बेगम खालिदा जिया और शेख हसीना के बीच रही है। रहमान अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस का स्थान लेंगे।
यूनुस के कार्यकाल में भारत-बांग्लादेश संबंधों में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले। अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि तारिक रहमान की विदेश नीति कैसी होगी और वे भारत के साथ संबंधों को किस दिशा में आगे बढ़ाते हैं।
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