Report: Dinanath Maurya, Edit: Yoganand Shrivastva
Aurangabad मोनिका का पेशेवर सफर काफी शानदार रहा है। उन्होंने अपनी तकनीकी शिक्षा पूरी करने के बाद एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में करियर की शुरुआत की थी। करियर में स्थिरता होने के बावजूद उनके मन में समाज के लिए कुछ प्रत्यक्ष योगदान देने की इच्छा थी। उनकी इस मेहनत और दृढ़ता ने उन्हें आज देश के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों की सूची में ला खड़ा किया है। औरंगाबाद की इस बेटी की सफलता आज पूरे जिले के लिए गर्व का विषय बन गई है।
कोविड काल ने बदली सोच: भाई-भाभी की सेवा से मिली प्रेरणा
Aurangabad मोनिका के जीवन में सबसे बड़ा वैचारिक बदलाव कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान आया। इस कठिन समय में उन्होंने देखा कि कैसे उनके भाई और भाभी प्रशासनिक व सामाजिक स्तर पर सक्रिय होकर लोगों की निस्वार्थ मदद कर रहे थे। दूसरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की इसी भावना ने मोनिका को गहरे तक प्रभावित किया। उन्होंने महसूस किया कि सिविल सेवा ही वह मंच है जहाँ से वे बड़े पैमाने पर जनहित के कार्य कर सकती हैं। इसी प्रेरणा के साथ उन्होंने सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के सुखद करियर को पीछे छोड़ प्रशासनिक सेवाओं की कठिन राह चुनी।
Aurangabad औरंगाबाद का समर्थन और जनमानस का प्रेम
Aurangabad मोनिका अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय केवल अपनी मेहनत को नहीं, बल्कि औरंगाबाद के लोगों के अटूट प्रेम और समर्थन को भी देती हैं। उनका मानना है कि स्थानीय लोगों और परिवार से मिले प्रोत्साहन ने उन्हें मानसिक रूप से कठिन समय में भी मजबूत बनाए रखा। अपनी मिट्टी से जुड़ाव और अपनों के विश्वास ने उनकी तैयारी के दौरान एक ‘कैटलिस्ट’ का काम किया, जिससे वे देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा में 16वीं रैंक हासिल करने में सफल रहीं।
छात्राओं के लिए संदेश: ‘हार न मानें, निरंतर मेहनत ही सफलता की कुंजी’
Aurangabad अपनी सफलता के बाद मोनिका ने विशेष रूप से अपने सहपाठियों और छात्राओं को प्रेरित किया है। उनका संदेश स्पष्ट है— राह में चुनौतियाँ कितनी भी बड़ी क्यों न हों, कभी हार नहीं माननी चाहिए। वे कहती हैं कि धैर्य और निरंतर परिश्रम से ही सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है। मोनिका का यह सफर आज उन सभी लड़कियों के लिए एक नई रोशनी लेकर आया है, जो तकनीकी क्षेत्र से निकलकर प्रशासन के जरिए समाज सेवा का सपना देखती हैं।





