वित्त और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने अपार्टमेंट मालिकों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के बीच मासिक रखरखाव पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लेकर चल रही उलझनों को दूर करने की कोशिश की है।
मंत्रालय ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि यदि किसी RWA का वार्षिक कारोबार 20 लाख रुपये से कम है, तो उसे जीएसटी के तहत पंजीकरण कराने या कर भुगतान करने की आवश्यकता नहीं होगी, भले ही प्रति सदस्य मासिक रखरखाव शुल्क 7,500 रुपये से अधिक हो।
जीएसटी लागू होने की शर्तें
- RWA को जीएसटी तभी देना होगा, जब प्रति सदस्य मासिक शुल्क 7,500 रुपये से अधिक हो और RWA का वार्षिक कारोबार (सेवाओं और सामान की आपूर्ति से) 20 लाख रुपये या उससे अधिक हो।
- यदि कोई व्यक्ति एक हाउसिंग सोसाइटी में दो या अधिक फ्लैट का मालिक है, तो 7,500 रुपये की सीमा प्रत्येक फ्लैट के लिए अलग-अलग लागू होगी।
- अगर रखरखाव शुल्क 7,500 रुपये से अधिक है, तो पूरी राशि पर 18% जीएसटी लागू होगा। उदाहरण के लिए, यदि शुल्क 9,000 रुपये प्रति माह है, तो 9,000 रुपये की पूरी राशि पर 18% जीएसटी देना होगा, न कि केवल 1,500 रुपये के अंतर पर।
इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ
मंत्रालय ने बताया कि जीएसटी के तहत RWA को पूंजीगत सामान (जैसे जनरेटर, वॉटर पंप, लॉन फर्नीचर), सामान (नल, पाइप, सैनिटरी फिटिंग्स) और सेवाओं (मरम्मत और रखरखाव) पर भुगतान किए गए कर पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ मिलेगा। यह सुविधा पहले वैट व्यवस्था में उपलब्ध नहीं थी, जिसके कारण RWA को अतिरिक्त लागत वहन करनी पड़ती थी। ITC से व्यवसाय अपनी कर देनदारी को कम कर सकते हैं।
जीएसटी छूट सीमा में बदलाव
18 जनवरी 2018 को जीएसटी परिषद की 25वीं बैठक में RWA और हाउसिंग सोसाइटियों को राहत देने के लिए मासिक छूट सीमा को 5,000 रुपये से बढ़ाकर 7,500 रुपये किया गया था।
निवासियों के लिए सलाह
- अपनी RWA से यह पुष्टि करें कि वह जीएसटी के तहत पंजीकृत है या नहीं।
- सोसाइटी के वार्षिक कारोबार की जानकारी लें।
- RWA के साथ चर्चा करें कि ITC का लाभ निवासियों तक कैसे पहुंच सकता है।
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