Isa Ahmad
Report- Farhan Khan
देशी–विदेशी पर्यटक हो रहे ठगी के शिकार
Agra: विश्व धरोहर ताजमहल की पश्चिमी पार्किंग और नीम तिराहा क्षेत्र में गाइडों की मनमानी और कमीशनखोरी से आगरा की अंतरराष्ट्रीय छवि को लगातार नुकसान पहुंच रहा है। यहां बनी कैनोपी और पुरानी मंडी क्षेत्र में कुछ स्टे व लोकल लेवल गाइड खुलेआम पर्यटकों को आवाजें लगाकर अपनी ओर खींच रहे हैं। “मेरी ये”, “मेरा ये”, “लाल वाली मेरी”, “सफेद वाली मेरी” जैसे शब्दों से पर्यटकों पर बोली लगाई जा रही है, जिससे यह ऐतिहासिक स्थल का प्रवेश क्षेत्र बाजार में तब्दील होता जा रहा है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यूपीटी और लोकल गाइड विशेष रूप से विदेशी पर्यटकों को निशाना बनाते हैं। घुमाने के नाम पर उनसे शुल्क वसूलने के बाद उन्हें जबरन दुकानों और शोरूमों तक ले जाया जाता है, जहां खरीदारी कराने पर 50 प्रतिशत तक की मोटी कमीशन ली जाती है। नियमों के अनुसार कोई भी गाइड पर्यटकों को किसी दुकान या शोरूम पर ले जाने का अधिकार नहीं रखता, इसके बावजूद यह खेल धड़ल्ले से चल रहा है।
कमीशनखोरी का संगठित नेटवर्क
कई गाइड ऐसे भी बताए जा रहे हैं जिन्हें ताजमहल के इतिहास की पर्याप्त जानकारी तक नहीं है। ये गाइड केवल पर्यटकों को “पकड़ने” का काम करते हैं और बाद में किसी अन्य गाइड को भेजकर 25 प्रतिशत तक की ‘सुआन’ यानी आधी कमीशन वसूलते हैं। नाम न छापने की शर्त पर कुछ गाइडों ने बताया कि पश्चिमी पार्किंग में दो दर्जन से अधिक ऐसे लोग सक्रिय हैं, जो केवल गाड़ियों को देखकर आवाज लगाते हैं और बाद में घुमाने वाले गाइडों से कमीशन मांगते हैं। कमीशन न देने पर पुलिस से बंद कराने की धमकी और संगठित समूह का दबाव बनाया जाता है।
पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
हैरानी की बात यह है कि यह पूरा खेल ताजमहल की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में चल रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। कई देशी और विदेशी पर्यटकों द्वारा पर्यटन थाने में शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद गाइडों पर शिकंजा कसने में पुलिस नाकाम नजर आ रही है। इससे ताज सुरक्षा पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं और लापरवाही व भ्रष्टाचार के आरोप भी लग रहे हैं।
आगरा की पर्यटन छवि हो रही धूमिल
देश-विदेश से ताजमहल देखने आने वाले पर्यटक इन अवैध गतिविधियों के कारण ठगी और दबाव का अनुभव कर रहे हैं। इसका सीधा असर आगरा की पर्यटन छवि पर पड़ रहा है और शहर की बदनामी अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच रही है।
मार्कशीट और लाइसेंस पर संदेह
सूत्रों के मुताबिक, डीओटी और यूपीटी से जुड़े दो दर्जन से अधिक गाइडों की मार्कशीट फर्जी होने का संदेह है। आरोप है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर लाइसेंस प्राप्त किए गए हैं। यदि जांच होती है तो कई गाइडों पर कार्रवाई संभव है।
गाइडों की मांग: हो योग्यता की जांच
पार्किंग में कार्यरत कुछ गाइडों ने आगरा पुलिस से मांग की है कि सभी गाइडों की योग्यता जांची जाए। यह परखा जाए कि उन्हें ताजमहल के इतिहास की जानकारी है या नहीं और क्या वे देशी–विदेशी पर्यटकों को गाइड करने में सक्षम हैं।
बड़ा सवाल – कब होगी कार्रवाई?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब तक पर्यटक इस कमीशनखोरी का शिकार होते रहेंगे। क्या आगरा पुलिस और ताज सुरक्षा में तैनात अधिकारी इन अवैध गाइडों और संगठित समूहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे, या फिर यह खेल यूं ही चलता रहेगा—इसका जवाब आने वाला वक्त ही देगा।





