सरकार ने वकील एक्ट (संशोधन) बिल 2025 को वापस ले लिया है। वकीलों की हड़ताल और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के तगड़े विरोध के बाद केंद्रीय कानून मंत्रालय ने शनिवार को ये ऐलान किया। बोले, “अब नए सिरे से सबके साथ बातचीत करके बिल तैयार करेंगे।” चलो, पूरी कहानी समझते हैं, देसी स्टाइल में!

क्या था बिल में ऐसा खास?
13 फरवरी को कानून मंत्रालय ने वकील एक्ट, 1961 में बदलाव का ड्राफ्ट अपनी वेबसाइट पर डाला था। प्लान था कि 28 फरवरी तक सबकी राय लेंगे। लेकिन भाई, इसमें कुछ ऐसे पॉइंट्स थे कि वकील भड़क गए। ये रहे वो मसाले:
- सरकारी दखल: सरकार बार काउंसिल में अपने 3 लोग बिठाना चाहती थी और BCI को ऑर्डर देने का हक भी लेना चाहती थी।
- विदेशी वकील: विदेशी लॉ फर्म और वकीलों को भारत में प्रैक्टिस की छूट देने की बात थी।
- नया नाम: “लीगल प्रैक्टिशनर” की डेफिनेशन में विदेशी फर्मों और कॉर्पोरेट में काम करने वाले वकीलों को भी जोड़ा गया।
- हड़ताल पर पाबंदी: एक नया नियम था कि वकील भाई लोग न कोर्ट का बहिष्कार कर सकते हैं, न हड़ताल। कोर्ट में हंगामा भी नहीं चलेगा।
सरकार का कहना था कि ये सब कानूनी पढ़ाई और पेशे को वर्ल्ड क्लास बनाने के लिए है। मकसद था वकीलों को टॉप लेवल का बनाना ताकि देश में इंसाफ और तरक्की दोनों हो। लेकिन ये बात वकीलों को पसंद नहीं आई।
वकीलों ने क्यों मचाया हंगामा?
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने कहा, “ये बिल हमारी आजादी छीन लेगा।” BCI के चेयरमैन और बीजेपी MP मनन कुमार मिश्रा ने कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल को चिट्ठी ठोक दी। बोले, “भाई, ये तो हमारी सत्ता पर डाका डालने जैसा है!” वकीलों ने भी लखनऊ समेत कई शहरों में सड़कों पर उतरकर नारे लगाए, हड़ताल की।
पिक्चर साफ है—वकील अपनी आजादी बचाने के लिए लड़े और सरकार को झुकना पड़ा।
सरकार का नया प्लान क्या?
मंत्रालय ने कहा, “हमने सबकी बात सुनी। अब जो सुझाव आए हैं, उनके हिसाब से बिल को दोबारा तैयार करेंगे। फिर से सबके साथ बैठकर बात करेंगे।” मतलब, अभी मामला ठंडा पड़ा है, लेकिन आगे देखते हैं क्या होता है।
वकील भाई लोग खुश हैं कि उनकी सुनी गई। पर ये भी सच है कि कानूनी पेशे में कुछ बदलाव तो जरूरी हैं। अब देखना ये है कि सरकार और वकील मिलकर क्या नया रास्ता निकालते हैं।
देसी नजरिया: आगे क्या होने वाला है?
अब सवाल ये है कि क्या सरकार और वकील एक टेबल पर बैठकर कोई बीच का रास्ता निकाल पाएंगे? क्योंकि भाई, बदलते जमाने में लॉ की पढ़ाई और प्रैक्टिस को अपडेट करना तो बनता है। लेकिन वकीलों की आजादी भी कोई मजाक नहीं है। चलो, इंतजार करते हैं अगले सीन का!
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