मध्यप्रदेश में मेलियोइडोसिस का अलर्ट: मिट्टी और पानी से फैलने वाला रोग बना गंभीर खतरा

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मध्यप्रदेश में मेलियोइडोसिस का अलर्ट: मिट्टी और पानी से फैलने वाला रोग बना गंभीर खतरा

BY: MOHIT JAIN

नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने मध्यप्रदेश में मेलियोइडोसिस को लेकर अलर्ट जारी किया है। यह संक्रामक बीमारी बर्कहोल्डेरिया स्यूडोमेलाई नामक बैक्टीरिया के कारण फैलती है, जो मिट्टी और पानी में पाया जाता है। बरसात और नमी के मौसम में इसके संक्रमण की संभावना और बढ़ जाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह रोग खासकर डायबिटीज, किडनी के मरीज और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के लिए जानलेवा हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे उभरती हुई उपेक्षित बीमारियों की सूची में शामिल किया है।

प्रभावित क्षेत्र और हाल की स्थिति

मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा अब इस रोग के नए हॉटस्पॉट बनते जा रहे हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वास्थ्य और कृषि विभाग को संयुक्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

एम्स भोपाल की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले छह सालों में प्रदेश के 20 से अधिक जिलों में 130 से अधिक मामले सामने आए हैं। इस बीमारी की मृत्यु दर लगभग 40% है। अधिकांश मामलों में लक्षण टीबी जैसी होने के कारण मरीजों को गलत इलाज मिलता है, जिससे संक्रमण पूरे शरीर में फैल जाता है।

हाल के मामलों और प्रशिक्षण

2023 से अब तक एम्स भोपाल ने चार विशेष प्रशिक्षण आयोजित किए हैं, जिनमें 50 से अधिक चिकित्सक और माइक्रोबायोलॉजिस्ट शामिल हुए। हाल ही में 14 नए मामले जीएमसी भोपाल, बीएमएचआरसी, जेके हॉस्पिटल, सागर और इंदौर से रिपोर्ट हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पहचान की क्षमता बढ़ने से अब अधिक मामले सामने आ रहे हैं।

मेलियोइडोसिस के लक्षण

  • अचानक तेज बुखार और सेप्सिस (खून का संक्रमण)
  • कम्युनिटी-एक्वायर्ड न्यूमोनिया (फेफड़ों का संक्रमण)
  • त्वचा और मुलायम ऊतक में फोड़े
  • लिवर, प्लीहा, प्रोस्टेट या पैरोटिड ग्रंथि में गहरे फोड़े
  • हड्डियों और जोड़ों का संक्रमण (ऑस्टियोमायलाइटिस, सेप्टिक आर्थ्राइटिस)
  • लंबे समय में टीबी जैसी स्थिति: वजन घटना, खांसी, बुखार और फेफड़ों में इन्फेक्शन

एम्स की सलाह: अगर किसी को 2–3 हफ्तों से अधिक बुखार है, एंटी-टीबी दवा से लाभ नहीं हो रहा या बार-बार फोड़े बन रहे हैं, तो तुरंत विशेषज्ञ से मेलियोइडोसिस की जांच करवाएं। यह सावधानी जीवन बचा सकती है।

रोग की पुष्टि के लिए जांच

  • खून, पस, थूक, यूरिन या सीएसएफ (रीढ़ के तरल) का सैंपल
  • ब्लड एगर, मैककॉनकी या ऐशडाउन मीडियम पर कल्चर टेस्ट
  • माइक्रोस्कोप में सुरक्षा-पिन जैसे धब्बे (Safety-pin staining)
  • ऑक्सीडेज पॉजिटिव बैक्टीरिया और अमिनोग्लाइकोसाइड्स/पोलिमिक्सिन रेसिस्टेंट
  • जहां संभव हो, पीसीआर टेस्ट से पुष्टि

बचाव के उपाय

  • खेत में काम करते समय जूते और दस्ताने पहनें
  • खुले घाव को मिट्टी और पानी से बचाएं
  • संदिग्ध लक्षण पर तुरंत जांच करवाएं
  • समय पर एंटीबायोटिक उपचार और डॉक्टर के बताए कोर्स का पालन करें

मध्यप्रदेश में यह रोग अब एंडेमिक (स्थानीय रूप से फैलने वाला) बन चुका है। समय रहते सतर्कता और सही इलाज ही जीवन बचा सकता है।