कुत्ते का हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार, तेरहवीं पर होगा पशु-पक्षियों का मृत्युभोज

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BY: Imran Khan

छतरपुर। जिले के राजनगर थाना क्षेत्र के ग्राम पिपट में एक अनोखा मामला सामने आया है। यहां एक पालतू कुत्ते तिलकधारी का पूरे हिंदू रीति-रिवाज और विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया गया। शोकसभा और दाह संस्कार में पूरे गांव ने भाग लिया।


मालिक ने कराया मुंडन, परंपराओं के साथ दी मुखाग्नि

तिलकधारी के मालिक राम संजीवन पटेरिया उर्फ़ सद्दू महाराज और उनके परिवार ने कुत्ते की चिता को मुखाग्नि दी। परंपरा के अनुसार पहले उन्होंने मुंडन कराया और हाथ में आग की मटकी लेकर “राम नाम सत्य है” का उद्घोष करते हुए शव यात्रा निकाली। खेत में विधिवत अंतिम संस्कार की सभी क्रियाएं पूरी की गईं। चिता दहन के बाद अंत्येष्टि में शामिल लोगों ने स्नान भी किया।


रामकली से तिलकधारी तक की कहानी

सद्दू महाराज ने बताया कि वर्षों पहले उनके पीछे-पीछे एक कुतिया आई थी, जिसका नाम उन्होंने रामकली रखा। रामकली ने उनके कुआं संत कुटी पर बच्चों को जन्म दिया था, लेकिन सभी बच्चे मर गए। केवल एक ही बच्चा जीवित बचा, जिसके माथे पर तिलक जैसा निशान था, इसलिए उसका नाम रखा गया तिलकधारी। रामकली की मौत श्मशान घाट पर हुई थी और पूरे गांव ने उसे देखा था। इसके बाद सद्दू महाराज ने तिलकधारी को पाला और बड़े लाड़-प्यार से उसका पालन-पोषण किया।


तिलकधारी के जन्म पर हुआ था भव्य चौका

तिलकधारी के जन्म के समय पूरे गांव में भव्य चौका (धार्मिक भोज) कराया गया था। गांव के बच्चे उसकी मां रामकली को “मासी” कहकर पुकारते थे। उम्रदराज़ होने के बाद शुक्रवार को तिलकधारी की मौत हो गई, जिसके बाद पूरे गांव और परिवारजन ने मिलकर अंतिम संस्कार किया।


गंगा विसर्जन और तेरहवीं की तैयारी

सद्दू महाराज ने बताया कि एक-दो दिन में वे तिलकधारी के फूल लेकर इलाहाबाद गंगा जी में विसर्जन करेंगे। वहीं, एक तारीख को उसकी तेरहवीं होगी। इस मौके पर पूरे गांव के कुत्तों, बिल्लियों, गायों और पक्षियों के लिए विशेष मृत्युभोज का आयोजन किया जाएगा।