राहुल गांधी का प्रेजेंटेशन: कर्नाटक, यूपी, हरियाणा में वोटर्स के नाम डिलीट करने का दावा, EC ने कहा आरोप निराधार

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‘हाईड्रोजन बम’ पर बोले तैयारी चल रही है

by: vijay nandan

नई दिल्ली : कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को नई दिल्ली के इंदिरा भवन ऑडिटोरियम में प्रेस कॉन्फ़्रेंस की। इस दौरान वे कर्नाटक के कुछ ऐसे मतदाताओं को भी मंच पर लेकर आए जिनके नाम हाल में मतदाता सूची से हटाए गए थे। राहुल ने 31 मिनट के अपने प्रेज़ेंटेशन में कहा कि चुनाव आयोग जानबूझकर कांग्रेस समर्थक वोटरों को निशाना बना रहा है। उन्होंने इसे “वोट चोरी” की साजिश बताते हुए सबूत पेश करने का दावा किया।

“देश के कई राज्यों में वही पैटर्न”

राहुल गांधी का कहना है कि महाराष्ट्र, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भी यही प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार उन लोगों की रक्षा कर रहे हैं जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

कर्नाटक का उदाहरण: 6,018 वोट हटाने की कोशिश

राहुल ने कर्नाटक के आलंद विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि 2023 के चुनाव में 6,000 से अधिक वोट डिलीट करने की कोशिश की गई। उनके मुताबिक, यह मामला तब सामने आया जब एक बूथ-लेवल अधिकारी ने पाया कि उसके चाचा का वोट बिना जानकारी के हटा दिया गया है। जांच में पता चला कि न तो वोट हटाने वाले को जानकारी थी और न ही जिसका वोट हटाया गया उसे। राहुल ने इसे सिस्टम के “हाईजैक” होने का नतीजा बताया।

मतदाताओं के नाम से फेक लॉगिन

प्रेस कॉन्फ़्रेंस में 63 वर्षीय गोदावाई का वीडियो भी दिखाया गया, जिसमें उन्होंने कहा कि उनका वोट और उनके पड़ोसियों के वोट बिना जानकारी के हटा दिए गए। राहुल का आरोप है कि गोदावाई के नाम से फर्जी लॉगिन बनाकर 12 लोगों के नाम डिलीट किए गए।

दूसरे राज्यों के मोबाइल नंबरों से काम

राहुल गांधी ने कहा कि मतदाताओं के नाम हटाने के लिए अन्य राज्यों से संचालित मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया गया। प्रेज़ेंटेशन में इन नंबरों का ज़िक्र किया गया और बताया गया कि कर्नाटक CID ने चुनाव आयोग को 18 बार पत्र लिखकर इनकी जानकारी मांगी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

कर्नाटक CID के सवाल

कर्नाटक CID ने चुनाव आयोग से तीन चीजें मांगीं:

  • जिन IP ऐड्रेस से आवेदन भरे गए
  • उन डिवाइसों के पोर्ट्स की जानकारी
  • OTP ट्रेल्स, क्योंकि हर डिलीशन के लिए OTP की जरूरत होती है

राहुल का कहना है कि ये जानकारी मिल जाए तो पता चल जाएगा कि ऑपरेशन कहां से चल रहा है।

“देश की डेमोक्रेसी हाईजैक”

राहुल ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा, “हमारा काम सच सामने लाना है। हम जो कह रहे हैं वह 100% सबूतों पर आधारित है। चुनाव आयोग को एक हफ्ते में कर्नाटक CID को जवाब देना चाहिए। वरना देश के युवा मान लेंगे कि आयोग संविधान की हत्या में शामिल है।”

उन्होंने कहा कि पिछली बार उन्होंने “ऐडिशन” (मतदाताओं को जोड़े जाने) में गड़बड़ी के सबूत दिए थे, इस बार “डिलीशन” के सबूत हैं।

पहले भी लगाए थे आरोप

राहुल गांधी इससे पहले भी कई बार चुनाव आयोग पर आरोप लगा चुके हैं।

  • 7 अगस्त 2025 को उन्होंने एक घंटे से अधिक लंबी प्रेस कॉन्फ़्रेंस में मतदाता सूची में गड़बड़ियों के सबूत दिखाए थे।
  • उन्होंने कर्नाटक की महादेवपुरा सीट पर 1 लाख वोट चोरी होने का आरोप लगाया था।
  • महाराष्ट्र में 40 लाख फर्जी नाम जोड़े जाने और हरियाणा में मतदाता सूची के कारण कांग्रेस की हार होने की बात भी कही थी।

चुनाव आयोग का जवाब: राहुल गांधी के आरोप “ग़लत और निराधार”

राहुल गांधी के आरोपों पर चुनाव आयोग ने आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि कांग्रेस नेता के दावे तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं। आयोग के अनुसार—

  • किसी भी आम नागरिक के लिए ऑनलाइन किसी का वोट हटाना संभव नहीं है। इस तरह की धारणा ग़लत है।
  • मतदाता सूची से किसी का नाम हटाने से पहले प्रभावित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर दिया जाता है
  • 2023 में आलंद विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं के नाम हटाने की कुछ असफल कोशिशें हुई थीं। इस मामले की जांच के लिए चुनाव आयोग के अधिकारियों ने स्वयं एफआईआर दर्ज कराई है।
  • आयोग के रिकॉर्ड बताते हैं कि आलंद सीट से 2018 में भाजपा के सुभाध गुट्टेदार और 2023 में कांग्रेस के बीआर पाटिल ने जीत हासिल की थी।

चुनाव आयोग का नया कदम

इस बीच चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव से EVM पर उम्मीदवारों की रंगीन तस्वीरें लगाने और बैलेट पेपर में बदलाव करने की घोषणा की है। साथ ही, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) देशभर में लागू करने की योजना भी बनाई है।

राहुल गांधी के आरोपों से मतदाता सूची की पारदर्शिता पर नई बहस छिड़ गई है। उनका कहना है कि वह सबूतों के आधार पर सच सामने ला रहे हैं और अब कानूनी संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि वे कार्रवाई करें। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से इस मुद्दे पर अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया है।

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