BY: MOHIT JAIN
भारत और अमेरिका आज नई दिल्ली में आमने-सामने व्यापार वार्ता फिर से शुरू करेंगे। यह बैठक विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर दंडात्मक शुल्क लगाया है। इस बैठक के जरिए दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर सहमति बनाने का प्रयास करेंगे।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की दिल्ली में उपस्थिति
दक्षिण और मध्य एशिया के लिए सहायक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ब्रेंडन लिंच के नेतृत्व में उच्च-स्तरीय अमेरिकी टीम भारतीय अधिकारियों से मुलाकात करेगी। इस बैठक को व्यापार वार्ता के भविष्य पर निर्णायक कहा जा रहा है। अमेरिकी टीम और भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
- बैठक में भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश अग्रवाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
- वित्त और कॉर्पोरेट मंत्रालय के अधिकारी भी इस वार्ता में मौजूद रहेंगे।
पिछली वार्ता और टकराव
अमेरिका की ओर से भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने के कारण, जिसमें रूस से तेल आयात पर 25 फीसदी दंडात्मक शुल्क शामिल था, अगस्त में छठे दौर की वार्ता स्थगित करनी पड़ी थी। तब से दोनों देश साप्ताहिक वर्चुअल बैठकें कर रहे थे, लेकिन पूर्ण समझौता नहीं हो पाया।
टेंशन के बावजूद उम्मीदें बनीं
हालांकि माहौल कुछ हद तक तनावपूर्ण है, दोनों देशों के नेता व्यापार समझौते को लेकर उत्सुक दिख रहे हैं। अमेरिकी सलाहकार पीटर नवारो ने सोमवार को भी भारत पर दबाव डालते हुए कहा कि नई दिल्ली अभी डील करने की कोशिश कर रही है।
व्यापार आंकड़े और दबाव
व्यापार मंत्रालय के अनुसार, अगस्त में भारत का अमेरिका को निर्यात जुलाई के 8.01 अरब डॉलर से घटकर 6.86 अरब डॉलर रह गया। अमेरिकी पक्ष भारत पर रूस से तेल खरीद कम करने का दबाव बना रहा है। उनका दावा है कि इस तेल खरीद से यूक्रेन के युद्ध के लिए वित्तीय मदद मिल रही है।
आज की बैठक भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के लिए अहम साबित हो सकती है। दोनों देशों के बीच टकराव के बावजूद, द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर सहमति की उम्मीद बरकरार है। यह वार्ता केवल व्यापार को नहीं, बल्कि द्विपक्षीय रणनीतिक संबंधों को भी प्रभावित कर सकती है।





