BY: Yoganand Shrivastva
लखनऊ, उत्तर प्रदेश: लखनऊ में एक रिटायर्ड IAS अधिकारी साइबर ठगों के शिकार बने। ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर उन्हें डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया और 12 लाख रुपए वसूल लिए। लखनऊ साइबर थाने की पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
घटना का विवरण
गोमतीनगर के विरामखंड-1 निवासी कृपा शंकर गौतम, जो केंद्रीय मंत्रालय में संयुक्त निदेशक के पद से रिटायर हुए हैं, को ठगों ने दो दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखा। अपराधियों ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में आरोपी बताकर डराया और पैसे वसूले।
साइबर अपराधियों ने वीडियो कॉल और ऑडियो कॉल के माध्यम से उन्हें घर में कैद कर रखा, किसी से बात करने या बाहर जाने की अनुमति नहीं दी। इसके माध्यम से उन्होंने अधिकारी को डराकर पैसे देने पर मजबूर किया।
डिजिटल अरेस्ट क्या है?
डिजिटल अरेस्ट कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। यह एक तरह की साइबर ठगी है, जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, CBI, ED या अन्य सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और उनसे धन, व्यक्तिगत जानकारी या संवेदनशील डेटा निकालते हैं।
जानकारी और सावधानी:
- वास्तविक पुलिस या सरकारी अधिकारी कभी ऑनलाइन अरेस्ट नहीं कर सकते।
- यदि संदेह हो, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन जाकर जांच कराएं।
- साइबर ठगी से बचने के लिए कॉल, ईमेल या संदेशों के जरिए किसी भी अनजान व्यक्ति को निजी जानकारी न दें।
इस घटना ने एक बार फिर यह चेतावनी दी है कि साइबर अपराध में सावधानी ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।





