BY: Yoganand Shrivastva
नई दिल्ली (31 अगस्त): पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण (EBP-20) को लेकर विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। इस मामले पर सोमवार (1 सितंबर) को सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। याचिका में आरोप लगाया गया है कि देशभर के वाहन मालिकों को जबरन इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जबकि यह कई पुराने वाहनों के लिए उपयुक्त नहीं है।
CJI की पीठ करेगी सुनवाई
इस जनहित याचिका को मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया है। याचिका दायर करने वाले वकील अक्षय मल्होत्रा ने कहा है कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उपभोक्ताओं को विकल्प मिले और केवल इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल खरीदने पर मजबूर न किया जाए।
इथेनॉल-फ्री पेट्रोल उपलब्ध कराने की मांग
याचिका में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय से सभी पेट्रोल पंपों पर शुद्ध (इथेनॉल-फ्री) पेट्रोल उपलब्ध कराने की मांग की गई है। साथ ही यह भी कहा गया है कि उपभोक्ताओं को इस बात की पूरी जानकारी दी जाए कि उनके वाहन इथेनॉल-मिश्रित ईंधन के लिए उपयुक्त हैं या नहीं।
पेट्रोल पंपों पर स्पष्ट लेबलिंग का प्रस्ताव
याचिकाकर्ता ने यह भी अनुरोध किया है कि हर पेट्रोल पंप और वितरण केंद्र पर इथेनॉल मिश्रण का प्रतिशत स्पष्ट रूप से दर्शाने वाले लेबल लगाए जाएं, ताकि ग्राहकों को ईंधन खरीदते समय पूरी पारदर्शिता मिल सके।





