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सामाजिक न्याय ही बाबा साहेब अंबेडकर के जीवन का सार – अजातशत्रु श्रीवास्तव

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Social justice is the essence of Baba Saheb Ambedkar's life - Ajatashatru Srivastava

भोपाल।
बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर का जीवन तीन मूलभूत मूल्यों – सामाजिक न्याय, आत्मसम्मान और स्वतंत्रता – पर आधारित रहा है। यही मूल्य प्रत्येक व्यक्ति के जीवन के लिए अनिवार्य हैं। यह बात सेवानिवृत्त आईएएस श्री अजातशत्रु श्रीवास्तव ने संघर्ष महामानव (लेखक: श्री रमेश पतंगे) पुस्तक पर आयोजित परिचर्चा में कही। यह कार्यक्रम भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ बाबूलाल गौर शासकीय महाविद्यालय, भेल एवं प्रज्ञा प्रवाह मध्यप्रांत के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।

बाबा साहेब की प्रासंगिकता आज भी बरकरार

श्री श्रीवास्तव ने कहा कि बाबा साहेब के निधन को 70 वर्ष से अधिक हो चुके हैं, किंतु उनकी विचारधारा आज भी उतनी ही प्रासंगिक और प्रेरणादायक है। उनके जीवन से तीन प्रमुख शिक्षाएँ मिलती हैं – संघर्ष, सम्यक शिक्षा और सामाजिक दृष्टिकोण। उन्होंने कहा कि यदि हम बेहतर इंसान बनना चाहते हैं तो इन तीनों मूल्यों को अपने जीवन में अपनाना आवश्यक है।

महिला शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका

परिचर्चा में प्रोफेसर अशोक शर्मा ने कहा कि डॉ. अंबेडकर के संघर्षमय जीवन में उनकी पत्नी रमाबाई अंबेडकर का योगदान अद्वितीय रहा। उन्होंने हर परिस्थिति में न केवल जीवनसंगिनी के रूप में, बल्कि प्रेरणास्रोत के रूप में उनका साथ दिया।

प्रो. शर्मा ने कहा कि महिला शक्ति का योगदान केवल पारिवारिक जीवन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि महिलाओं ने डॉ. अंबेडकर के विचारों और कार्यों को भी बल दिया। महिलाओं के शिक्षा, समानता और अधिकारों पर उनके दृष्टिकोण को आकार देने में उनके जीवन के अनुभव और महिलाओं का योगदान महत्वपूर्ण रहा। यह इस बात का प्रमाण है कि किसी भी महान व्यक्तित्व के निर्माण में महिलाओं की भूमिका अत्यंत अहम होती है।

दलित समाज और आर्थिक चिंतन पर विचार

इस अवसर पर श्री मथुरा प्रसाद (अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा विभाग) ने अपने वक्तव्य में कहा कि दलित समाज की पिछड़ी स्थिति के लिए केवल सामाजिक परंपराएँ ही नहीं, बल्कि मुगलों और अंग्रेजों की नीतियाँ भी जिम्मेदार थीं। उन्होंने बताया कि बाबा साहेब के पिता ने उन्हें धर्म, संस्कृति और संस्कार की गहरी शिक्षा दी थी।

उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने राजनीतिक और सामाजिक अधिकारिता सुनिश्चित करने के लिए ऐतिहासिक कार्य किए। अंग्रेजों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को तोड़कर भारतीय संसाधनों का शोषण किया और ब्रिटेन को समृद्ध बनाया। ऐसे समय में अंबेडकर का आर्थिक चिंतन आज भी प्रासंगिक और मार्गदर्शक है।

कार्यक्रम में रही व्यापक सहभागिता

परिचर्चा में महाविद्यालय के प्राचार्य श्री संजय जैन, भोपाल विभाग संयोजक श्री भूपेंद्र सिंह जाटव, प्रज्ञा प्रवाह की प्रांत कार्यकारिणी सदस्य श्री रीतेश शर्मा, डॉ. सविता भदोरिया, श्री अभिषेक शर्मा (युवा आयाम प्रमुख) सहित बड़ी संख्या में महाविद्यालय के प्राध्यापक और छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

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