BY: Yoganand Shrivastva
भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े “माखन चोर” वाले संबोधन को लेकर नई पहल करने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर प्रदेश में एक सामाजिक चेतना अभियान चलाया जाएगा, जिसमें कृष्ण के जीवन प्रसंगों को तथ्यात्मक रूप से प्रस्तुत किया जाएगा।
मुख्यमंत्री का दृष्टिकोण
जन्माष्टमी पर सीएम मोहन यादव ने कहा था –
“कृष्ण का माखन के प्रति लगाव केवल स्वाद के लिए नहीं था, बल्कि यह अत्याचार के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक था। उस समय कंस के घर माखन पहुंचता था, और उसी आक्रोश को जताने के लिए बाल ग्वालों की टोली बनाई गई थी ताकि दुश्मन को माखन न मिले।”
सांस्कृतिक सलाहकार का बयान
मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी ने बताया कि भारतीय परंपरा और देवताओं के बारे में समय-समय पर गलत धारणाएँ गढ़ी गईं। अब उद्देश्य है कि समाज के सामने सही तथ्य रखे जाएं। उन्होंने कहा –
“हमारे शास्त्रों और परंपराओं से जुड़े कई मिथकों को तोड़ने की जरूरत है। जैसे कभी महाभारत और रामायण के अस्तित्व पर भी सवाल उठाए जाते थे, वैसे ही कृष्ण को लेकर भ्रम फैलाए गए। अब प्रदेश में इनके सही रूप को सामने लाने का प्रयास होगा।”
श्रीकृष्ण से जुड़े मध्य प्रदेश के स्थल
- धार (अमका-झमका): रुक्मणीजी ने यहीं श्रीकृष्ण के साथ रहने का निर्णय लिया था।
- उज्जैन: मित्रवृंदा का संबंध यहीं से था, जो उनकी आठ पटरानियों में शामिल थीं।
- रायसेन (जामगढ़ की पहाड़ियाँ): जाम्बवती से विवाह और जामवंत-कृष्ण युद्ध का प्रसंग यहीं जुड़ा है।
सरकार का कहना है कि इन स्थानों के विकास और प्रचार से समाज को अपनी परंपरा से गहराई से जोड़ा जाएगा।
मंदिरों का सर्वे और योजना
संस्कृति विभाग के सर्वे के अनुसार प्रदेश में श्रीकृष्ण के लगभग 3222 मंदिर हैं। सरकार ने इन मंदिरों की साफ-सफाई, श्रृंगार और संरक्षण की विशेष योजना बनाई है।
- जन्माष्टमी पर सर्वश्रेष्ठ सजावट करने वाले मंदिरों को पुरस्कार दिए जाएंगे –
- प्रथम: ₹1.5 लाख
- द्वितीय: ₹1 लाख
समाज और सरकार की संयुक्त भूमिका
श्रीराम तिवारी ने कहा – “राज्य और समाज एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। सरकार मार्गदर्शन और सुरक्षा दे सकती है, लेकिन समाज को भी अपने प्राचीन वैभव और शिक्षाओं से जुड़ना होगा। जब तक जनता श्रीराम और श्रीकृष्ण की शिक्षाओं को आत्मसात नहीं करेगी, तब तक उद्देश्य पूरा नहीं होगा।”





