BY: Yoganand Shrivastva
फिल्मी दुनिया की चमक-धमक जितनी मोहक लगती है, उसकी परछाइयाँ उतनी ही कड़वी और डरावनी हो सकती हैं। सितारों की कहानियाँ अक्सर सफलता और शोहरत से भरी होती हैं, लेकिन कुछ किस्से ऐसे भी हैं जो दिल दहला देते हैं। ऐसी ही दर्दनाक कहानी है दक्षिण भारतीय फिल्मों की मशहूर अदाकारा निशा नूर की, जिन्होंने रजनीकांत और कमल हासन जैसे दिग्गज कलाकारों संग स्क्रीन शेयर किया, लेकिन अंत में गरीबी, बेबसी और बीमारी की अंधेरी गलियों में गुम हो गईं।
ग्लैमर की दुनिया में तेज़ी से उभरा सितारा
निशा नूर ने 1980 में तमिल फिल्म मंगला नायगी से अभिनय की शुरुआत की। खूबसूरती और अभिनय के दम पर उन्होंने जल्दी ही तमिल के साथ-साथ तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ फिल्मों में अपनी जगह बना ली।
- टिक टिक टिक में कमल हासन के साथ उनकी जोड़ी को सराहा गया।
- रजनीकांत के साथ श्री राघवेंद्र में उनके अभिनय की खूब चर्चा हुई।
- अवल सुमंगलीथन, देवासुरम और कल्याण अगथिगल जैसी फिल्मों में भी उन्होंने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।
उस दौर में वे उन अदाकाराओं में गिनी जाती थीं, जो सिर्फ स्क्रीन पर आते ही सीन को खास बना देती थीं।
करियर का अचानक ढलता सूरज
चमकते करियर के बीच धीरे-धीरे काम के अवसर कम होने लगे। उस समय कलाकारों के पास सोशल मीडिया जैसा कोई सहारा नहीं था। नतीजतन, निशा नूर अकेलेपन और आर्थिक तंगी से जूझने लगीं।
सूत्रों के अनुसार, फिल्म इंडस्ट्री में गिरते कद और मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें वेश्यावृत्ति की अंधेरी दुनिया में धकेल दिया गया। यह घटना उनके जीवन और करियर दोनों के लिए विनाशकारी साबित हुई। इंडस्ट्री, जिसने कभी उन्हें सिर पर बिठाया था, बाद में पूरी तरह किनारा कर गई।
आखिरी दिन: दर्द और तन्हाई से घिरी जिंदगी
लंबे समय तक गुमनामी में रहने के बाद, एक दिन उन्हें चेन्नई की एक दरगाह के बाहर बेहद खराब हालत में पाया गया। वे इतनी कमजोर हो चुकी थीं कि पहचान पाना मुश्किल था। बाद में पता चला कि वे HIV/AIDS से पीड़ित थीं।
उनकी हालत की खबर जब एक सामाजिक संगठन तक पहुँची तो उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन तब तक बीमारी काफी बढ़ चुकी थी। साल 2007 में निशा नूर ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
यादों में जिंदा एक दर्दभरी दास्तां
निशा नूर की कहानी सिर्फ एक अभिनेत्री की गिरावट नहीं, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री की बेरहम हकीकत का आईना है। शोहरत की ऊँचाइयों से गुमनामी की गहराइयों तक उनका सफर बताता है कि चकाचौंध के पीछे कितनी तकलीफें छिपी होती हैं।





