बच्चों के भविष्य की योजना अधर में, जयंत सिन्हा बोले- अफसरों के पैर भी पकड़ लूंगा

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बच्चों के भविष्य की योजना अधर में, जयंत सिन्हा बोले- अफसरों के पैर भी पकड़ लूंगा

रिपोर्टर: रूपेश कुमार, हजारीबाग

हजारीबाग में बच्चों को पौष्टिक भोजन देने का जो सपना देखा गया था, वह अब अधूरा लगता है। पूर्व केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा जब सांसद थे, तब अक्षय पात्र योजना को ज़िले के हर सरकारी स्कूल तक पहुँचाने का सपना देखा था। लेकिन हकीकत ये है कि आज ये योजना सिर्फ 27 स्कूलों तक ही सिमटकर रह गई है।


जयंत सिन्हा की भावुक अपील: “पैर पकड़ने को भी तैयार हूं”

जयंत सिन्हा ने सार्वजनिक रूप से अधिकारियों से अपील करते हुए कहा:

“मैं हाथ जोड़कर आग्रह करता हूँ कि इस योजना को पूरा किया जाए। अगर ज़रूरत पड़ी तो अफसरों के पैर पकड़ने को भी तैयार हूँ।”

उनकी यह अपील न केवल भावनात्मक थी, बल्कि उस निराशा और चिंता को भी दिखाती है जो योजना के ठप पड़ने से पैदा हुई है।


क्या है अक्षय पात्र योजना का उद्देश्य?

  • सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को हर दिन गरम, पौष्टिक भोजन देना।
  • झारखंड का यह मेगा किचन रोज़ाना तैयार करता:
    • 10,000 किलो चावल
    • 5,000 किलो दाल
    • 5,500 किलो सब्ज़ी
  • इससे स्थानीय किसानों को भी रोज़गार और बाज़ार मिलना था।

पर अफसोस, एक बॉयलर खराब होने की वजह से पूरा खाना बनना बंद हो गया है, और अब हजारों बच्चे इससे वंचित हैं।


“बच्चों के भविष्य से मत खेलिए” – जयंत सिन्हा

जयंत सिन्हा ने अपनी चिंता ज़ाहिर करते हुए कहा:

“एक बॉयलर के कारण खाना नहीं बन रहा, ये दुर्भाग्यपूर्ण है। अब मैं एक आम नागरिक हूँ, केवल प्रार्थना ही कर सकता हूँ।”

उनके इस बयान में उस निराशा की झलक थी, जो बच्चों के सपनों के टूटने से जुड़ी है।


प्रशासन ने लिया संज्ञान

इस मामले को अब जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह ने कहा:

“कुछ तकनीकी समस्याएं थीं, जिन्हें जल्द ही हल किया जा रहा है। हम इस योजना को लेकर गंभीर हैं।”

यह एक उम्मीद की किरण है कि शायद जल्द ही हालात बदलें।


ये सिर्फ एक योजना नहीं, बच्चों के सपनों का सवाल है

अक्षय पात्र योजना केवल भोजन की बात नहीं करती, ये बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य को पोषित करने वाली योजना है। यह खाना उनके सपनों का ईंधन है।


जयंत सिन्हा की भावुक अपील प्रशासन तक पहुँच चुकी है। अब देखने वाली बात होगी कि क्या यह सिर्फ़ आश्वासन तक सीमित रहती है या ज़मीनी स्तर पर भी बदलाव आता है। क्योंकि एक बॉयलर से रुक सकता है खाना, लेकिन सपनों को थमने नहीं देना चाहिए।

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