भारत में पहली बार केरल हाई कोर्ट ने निचली अदालतों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उपकरणों से न्यायिक आदेश जारी करने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ChatGPT जैसे क्लाउड-आधारित AI टूल्स का प्रयोग किसी आदेश या निर्णय के लिए नहीं किया जाना चाहिए। यदि कोई न्यायिक अधिकारी ऐसा करता है, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
क्या कहा गया है कोर्ट के दिशा-निर्देशों में?
केरल हाई कोर्ट ने निचली अदालतों और न्यायिक अधिकारियों के लिए विस्तृत गाइडलाइंस जारी की हैं, जिनमें कहा गया है:
- निष्कर्ष निकालने या निर्णय देने के लिए AI टूल्स का उपयोग प्रतिबंधित है।
- AI टूल्स में संभावित त्रुटियों को ध्यान में रखते हुए विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
- सभी AI टूल्स का प्रयोग केवल अनुमोदित और प्रशिक्षित अधिकारियों द्वारा ही किया जा सकता है।
AI इस्तेमाल से पहले अनिवार्य प्रशिक्षण
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कोई भी न्यायिक अधिकारी AI का प्रयोग तभी कर सकता है जब वह:
- न्यायिक अकादमी या हाई कोर्ट द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग ले चुका हो।
- केवल स्वीकृत AI उपकरणों का ही प्रयोग किया जाए।
- AI टूल्स के उपयोग के हर चरण की निगरानी आवश्यक है।
यदि किसी स्वीकृत AI सिस्टम में तकनीकी गड़बड़ी या अनियमितता मिलती है, तो केरल हाई कोर्ट के आईटी विभाग को तुरंत सूचना देना अनिवार्य होगा।
केरल हाई कोर्ट की स्थापना पर एक नजर
- स्थापना: 1 नवंबर 1956
- स्थान: कोच्चि, केरल
- अधिकार क्षेत्र: केरल और केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप
- यह कोर्ट भारत के राज्यों के पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के तहत गठित हुआ था।
केरल हाई कोर्ट का यह कदम तकनीकी प्रगति के बावजूद न्यायिक प्रक्रिया में मानवीय विवेक और सटीकता को प्राथमिकता देने की दिशा में एक मजबूत संकेत है। जहां एक ओर AI कई क्षेत्रों में सहायक साबित हो रहा है, वहीं न्याय व्यवस्था में इसकी भूमिका अभी सीमित रखने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। यह फैसला न्यायिक पारदर्शिता और सटीकता को बनाए रखने के लिए एक अहम दिशा में लिया गया निर्णय है।