रिपोर्टर: संजू जैन
बेमेतरा जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा 9 जुलाई 2025 को जारी किया गया एक विवादित आदेश, जिसमें विद्यालयीन छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन, ताला-प्रदर्शन या चक्का-जाम पर शाला प्रबंधन पर कार्रवाई की बात कही गई है, आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की कड़ी आलोचना का विषय बन गया। ABVP बेमेतरा इकाई ने कलेक्टर से मिलकर इसका तत्काल निरस्तीकरण माँगा।
ABVP का स्टैंड
जिला संयोजक संदीप यदु ने बताया:
- ABVP पिछले 77 वर्षों से छात्र हित, राष्ट्रीय हित और समाज के हित में कार्यरत है।
- यह आदेश छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन के अधिकार का उल्लंघन करता है, जो समाजिक रूप से मान्य और संवैधानिक है।
- छात्र जब शिक्षकों की कमी, शिक्षण सुविधाओं की कमी या अन्य शैक्षणिक मुद्दों पर आवाज उठाते हैं, तो शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करना उनका संवैधानिक अधिकार है, और इसे दबाना अस्वीकार्य है।
ABVP ने चेतावनी दी है:
“यदि आदेश तुरंत निरस्त नहीं किया गया, तो हम उग्र आंदोलन और डीईओ कार्यालय का घेराव करने को मजबूर होंगे।”
आदेश में क्या लिखा है?
- विद्यालयीन छात्रों द्वारा किसी भी प्रकार के प्रदर्शन, ताला-बंद या चक्का-ज़ाम की स्थिति उत्पन्न होने पर, संबंधित शाला प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी।
- आदेश में यह निर्देश भी शामिल है कि शैक्षणिक शांति बनाए रखने के लिए सभी जिम्मेदार लोगों पर दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
संवैधानिक मुद्दा
- शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत उपलब्ध स्वतंत्र अभिव्यक्ति अधिकार को संरक्षण देता है।
- ABVP का कहना है कि यह आदेश छात्रों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है और शासकीय दमन की कोशिश है।
अब क्या हो सकता है?
| कार्रवाई | संभावना |
|---|---|
| कलेक्टर की प्रतिक्रिया | ज्ञापन मिलने के बाद पुनर्विचार हो सकता है और छात्र हित में बदलाव हो सकता है। |
| ABVP का अगला कदम | आदेश निरस्त नहीं होने पर उग्र आंदोलन की रणनीति तैयार है—जैसे डीईओ कार्यालय का घेराव। |
| सरकारी दृष्टिकोण | छत्तीसगढ़ शासन छात्र अधिकारों का सम्मान करता है, इसलिए कार्रवाई का रुख संवाद-मूलक रहेगा। |





