संवाददाता – राजेश साहू
जुड़वां बच्चों की कहानियां आपने फिल्मों में देखी होंगी, लेकिन अब ऐसी ही एक सच्ची और प्रेरणादायक कहानी सामने आई है बालोद जिले के बोहारडीह गांव से, जहाँ कुल चार जुड़वां जोड़े पढ़ाई में पीछे नहीं—बल्कि नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं।
गांव की चार जोड़ी जुड़वां
बोहारडीह के सरकारी स्कूल में यह दुर्लभ दृश्य देखने को मिला है—चार अलग‑अलग जोड़ों के जुड़वां बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं:
- नूतेश–नूतांश
- वेदिका–वेदांशी
- डेनिशा–डेलिशा
- नीला–नीलिमा
इनमें से कुछ अभी आंगनबाड़ी की उम्र में हैं, कुछ कक्षा‑1 में हैं और दो जोड़े अब हायर सेकेंडरी में पढ़ाई कर रहे हैं। उनकी साझा पहचान केवल शारीरिक नहीं, बल्कि शिक्षा के प्रति लगन, अनुशासन और गाँव को नाम रोशन करने की भावना भी है।
शिक्षाद्ध्यान में उत्कृष्टता
शिक्षकों का कहना है कि इस चारों किरदारों ने स्कूल को एक नई पहचान दी है:
- चेहरे तो मिलते-जुलते हैं, लेकिन स्वभाव में भिन्नता—कुछ शांत, कुछ चंचल
- इन बच्चों के आते ही स्कूल में उत्साह और ऊर्जा का माहौल बना है
- शिक्षिका साधना नेताम बताती हैं कि “इन बच्चों ने स्कूल की छवि को बेहतर किया है”
गांववाले: बच्चों पर गर्व
गाँव के लोग भी इन बच्चों को गाँव की ‘शान’ मानते हैं:
- आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रत्नाबाई यादव कहती हैं कि बच्चों का सभी योजनाओं में शामिल होना सामाजिक समावेश का प्रमाण है
- उपसरपंच तारा मंडावी और ग्रामीण गिरवर श्याम ने बताया कि इन बच्चों से प्रेरणा मिलती है और यह गाँव के सभी बच्चों के लिए आदर्श बन चुके हैं





