प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर जताया असंतोष
सरगुजा जिले में युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया को लेकर शिक्षकों में भारी असंतोष व्याप्त है। काउंसलिंग शुरू होने से पहले ही शिक्षकों ने इसका बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। सोमवार को बड़ी संख्या में शिक्षक संघ के प्रतिनिधियों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई और युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया में हो रही त्रुटियों और विसंगतियों के खिलाफ ज्ञापन सौंपा।
शिक्षकों ने उठाए गंभीर सवाल
शिक्षकों का कहना है कि युक्तियुक्तकरण की वर्तमान प्रक्रिया नियमों और पारदर्शिता से परे है। उन्होंने कई गंभीर बिंदुओं पर सवाल खड़े किए हैं:
हॉस्टल अधीक्षकों को युक्तियुक्तकरण की सूची से बाहर रखा गया है, जिससे उनकी नियुक्ति और स्थानांतरण को लेकर भ्रम की स्थिति है।
माध्यमिक शालाओं में विषय बंधन का कोई स्पष्ट निर्धारण नहीं किया गया है।
परिवीक्षा अवधि में कार्यरत शिक्षकों को अतिशेष सूची में डालना नियमों के विरुद्ध है, फिर भी ऐसा किया जा रहा है।
हाई स्कूल व हायर सेकेंडरी स्कूलों में 2008 के सेटअप के अनुसार काउंसलिंग के निर्देश हैं, लेकिन इन निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है।
“शिक्षकों की रीड तोड़ी जा रही है” – शिक्षक संघ
शिक्षकों ने आरोप लगाया कि बिना उचित योजना और नियमों के पालन के किए जा रहे युक्तियुक्तकरण से शिक्षकों की गरिमा और स्थायित्व दोनों को खतरा उत्पन्न हो रहा है। उन्होंने कहा,
“यह प्रक्रिया विसंगतियों से भरी हुई है, इसका कोई आधार नहीं है। बिना नियमों के पालन के यह व्यवस्था लागू कर शिक्षकों की रीड तोड़ी जा रही है।”
विसंगतियों को दूर कर युक्तियुक्तकरण की मांग
शिक्षकों ने मांग की है कि युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया को स्थगित कर उसमें व्याप्त त्रुटियों को सुधारा जाए, और सभी वर्गों के शिक्षकों को समान अवसर और न्यायपूर्ण प्रक्रिया के तहत शामिल किया जाए।
प्रशासन पर जवाबदेही का दबाव
इस विरोध के बाद जिला प्रशासन पर युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया को लेकर पुनर्विचार करने और पारदर्शिता बरतने का दबाव बढ़ गया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन शिक्षकों की मांगों पर कितना अमल करता है।





