भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने हाल ही में सिंगापुर में आयोजित शंगरी-ला डायलॉग में एक महत्वपूर्ण संबोधन दिया। इस दौरान उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव और दुश्मनी के मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
भारत-पाकिस्तान रिश्तों पर CDS का कड़ा बयान
जनरल अनिल चौहान ने कहा कि भारत ने कई बार पाकिस्तान को दोस्ती का हाथ बढ़ाया, लेकिन बदले में हमेशा दुश्मनी ही मिली। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान हालात में भारत के लिए अलगाववाद की रणनीति ही बेहतर विकल्प साबित हो रही है।
“2014 में हमने कूटनीतिक पहल की थी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को आमंत्रित किया था। लेकिन ताली केवल एक हाथ से नहीं बजती। इसलिए फिलहाल अलगाव की नीति ही कारगर दिखती है।” – CDS अनिल चौहान
यह स्पष्ट बयान दर्शाता है कि भारत अब बिना ठोस रणनीति के पाकिस्तान के साथ संबंधों को आगे नहीं बढ़ा रहा है।
भारत की दीर्घकालिक रणनीति और प्रगति
सीडीएस ने यह भी बताया कि आज भारत आर्थिक, सामाजिक और मानव विकास के सभी क्षेत्रों में पाकिस्तान से आगे है। यह किसी संयोग से नहीं, बल्कि सतत और दीर्घकालिक रणनीति का परिणाम है।
- आर्थिक प्रगति: भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है।
- सामाजिक सद्भाव: बेहतर मानव विकास सूचकांक के साथ भारत का सामाजिक स्वरूप सुधरा है।
- राजनीतिक स्थिरता: कूटनीति और रणनीतिक फैसलों में भारत अधिक सक्षम हुआ है।
हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक महत्ता
सीडीएस ने कहा कि भारत का फोकस अब खासतौर पर हिंद महासागर और इसके द्वीपीय क्षेत्रों पर है। उनकी रणनीति में इस क्षेत्र की गहराई और भौगोलिक स्थिति को समझदारी से इस्तेमाल करना शामिल है।
- हिंद महासागर का महत्व: भारत के द्वीपीय क्षेत्र और हिंद महासागर में पहुंच हमें रणनीतिक फायदा देते हैं।
- भू-राजनीतिक चुनौतियां: चीन के साथ उत्तर में तनाव और म्यांमार में अस्थिरता के कारण भारत के विकल्प सीमित हैं।
- मेरीटाइम हित: अब भारत दक्षिण की ओर भी अपनी नजरें गढ़ा रहा है, जहां संभावनाएं काफी हैं।
“हम मध्य और पश्चिम एशिया से राजनीतिक रूप से जुड़े हुए हैं, लेकिन भू-राजनीतिक रूप से अलग हैं। इसलिए समुद्र हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।” – CDS अनिल चौहान
शंगरी-ला डायलॉग की भूमिका
शंगरी-ला डायलॉग एक प्रमुख वैश्विक सुरक्षा सम्मेलन है, जहां भारत के सीडीएस ने स्पष्ट तौर पर भारत की रक्षा और विदेश नीति के बारे में अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भारत अब न केवल अपने क्षेत्रीय हितों को ध्यान में रखकर रणनीति बना रहा है, बल्कि विश्व मंच पर भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
प्रमुख बिंदु
- भारत ने पाकिस्तान को कई बार दोस्ती का हाथ बढ़ाया, पर बदले में दुश्मनी मिली।
- 2014 में कूटनीतिक प्रयास हुए, लेकिन असफल साबित हुए।
- भारत अब अलगाववाद की रणनीति पर काम कर रहा है।
- भारत आर्थिक, सामाजिक, और मानवीय विकास में पाकिस्तान से आगे है।
- हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक गहराई बढ़ रही है।
- चीन और म्यांमार की चुनौतियों के कारण भारत का फोकस समुद्री रास्तों पर ज्यादा है।
निष्कर्ष
सीडीएस अनिल चौहान का यह बयान भारत की विदेश नीति और रक्षा रणनीति की गहराई को दर्शाता है। भारत-पाकिस्तान संबंधों में अब पारंपरिक दोस्ती की उम्मीद कम है, और भारत अपनी सुरक्षा व विकास के लिए अधिक व्यावहारिक और दीर्घकालिक रणनीतियों पर काम कर रहा है। हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती पकड़ भी उसकी वैश्विक महत्वाकांक्षा का हिस्सा है।
इस पूरे विषय में भारत का रुख स्पष्ट है – सतर्कता, रणनीतिक समझदारी, और अपने हितों की सर्वोच्च प्राथमिकता।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. CDS अनिल चौहान ने पाकिस्तान के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि भारत ने दोस्ती का हाथ बढ़ाया, लेकिन बदले में दुश्मनी मिली, इसलिए फिलहाल अलगाववाद ही बेहतर रणनीति है।
2. भारत की हिंद महासागर रणनीति क्या है?
भारत समुद्री क्षेत्र में अपनी पहुंच बढ़ा रहा है ताकि भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच अपनी सुरक्षा और आर्थिक हितों को सुनिश्चित किया जा सके।
3. शंगरी-ला डायलॉग क्या है?
यह एक प्रमुख एशियाई सुरक्षा सम्मेलन है, जहां वैश्विक सैन्य और कूटनीतिक अधिकारी रणनीति और सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा करते हैं।