BY: Yoganand Shrivastva
चीन के तिब्बत क्षेत्र में शुक्रवार सुबह एक बार फिर धरती कांप उठी। सुबह करीब 9 बजकर 27 मिनट पर आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.2 मापी गई। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के मुताबिक, इसका केंद्र चीन और नेपाल की सीमा के नज़दीक था।
हाल के दिनों में इस इलाके में कई बार भूकंप के झटके महसूस किए जा चुके हैं। इससे पहले चीन के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में बड़े भूस्खलन की खबर आई थी, जिसमें 4 लोगों की मौत हो चुकी है और 17 से अधिक लोग मलबे में दबे हुए हैं।
भूकंप क्यों आते हैं?
धरती के भीतर सात टेक्टोनिक प्लेट्स लगातार हिलती रहती हैं। जब ये प्लेट्स एक-दूसरे से टकराती हैं या आपस में घर्षण होता है, तो उससे उत्पन्न ऊर्जा के कारण धरती में कंपन होता है, जिसे हम भूकंप कहते हैं। भूकंप से मकान ढह सकते हैं और बड़ी संख्या में जनहानि हो सकती है।
भारत में भूकंप के लिहाज से कौन से क्षेत्र हैं संवेदनशील?
भारत का लगभग 59% हिस्सा भूकंप संभावित क्षेत्रों में आता है। भूगर्भ वैज्ञानिकों ने इसे चार जोनों में बांटा है—जोन-2 से लेकर जोन-5 तक।
- जोन-5: सबसे अधिक खतरे वाला क्षेत्र (जैसे उत्तर पूर्वी भारत, कश्मीर, उत्तराखंड का कुछ हिस्सा)
- जोन-4: उच्च जोखिम (जैसे दिल्ली, हरियाणा, बिहार)
- जोन-3 और जोन-2: मध्यम से कम खतरा
हिमालय क्षेत्र सबसे संवेदनशील माना जाता है क्योंकि यहां भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है।
रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता का क्या मतलब होता है?
- 4.0 – 4.9: हल्का झटका, घर की वस्तुएं गिर सकती हैं
- 5.0 – 5.9: फर्नीचर हिल सकता है, दीवारों में दरारें
- 6.0 – 6.9: इमारतें क्षतिग्रस्त हो सकती हैं
- 7.0 – 7.9: बड़े पैमाने पर विनाश
- 8.0 – 8.9: अत्यंत गंभीर, सुनामी का खतरा
- 9.0+: महाविनाशकारी, दुर्लभ लेकिन घातक
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