जबलपुर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह को 19 मार्च को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का आदेश दिया है। यह आदेश एक मामले में दो अलग-अलग एकल पीठों द्वारा जारी किया गया है। भोपाल कलेक्टर के खिलाफ एक पीठ ने जमानती वारंट जारी किया था, जिसके बाद वह कोर्ट में पेश हुए। हालांकि, दूसरी पीठ के समक्ष उन्होंने हाजिरी नहीं दी और माफीनामा दाखिल किया। इस पर हाईकोर्ट ने गंभीरता दिखाते हुए उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है।
आरआरसी मामले में अवमानना याचिका
गौरतलब है कि रेरा द्वारा जारी आरआरसी (RRC) के निपटारे में देरी को लेकर दो अलग-अलग याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की थी। इनमें से एक याचिका की सुनवाई करते हुए जस्टिस विवेक अग्रवाल ने भोपाल कलेक्टर के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया। वहीं, दूसरी याचिका की सुनवाई कर रहे जस्टिस एके सिंह की पीठ ने भी कलेक्टर को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का आदेश दिया।

दिल्ली में आधिकारिक कार्य का हवाला
भोपाल कलेक्टर ने जस्टिस एके सिंह की पीठ के समक्ष हाजिर नहीं होने के लिए माफीनामा दाखिल किया। उन्होंने दिल्ली में आधिकारिक कार्यों में व्यस्त होने का हवाला दिया। हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील ने आरोप लगाया कि कलेक्टर ने जानबूझकर हाजिरी से बचने के लिए यह आवेदन दाखिल किया है। इस पर कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए कलेक्टर को 19 मार्च को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का आदेश दिया।
याचिकाकर्ता की तरफ से पैरवी
याचिकाकर्ता की ओर से वकील ध्रुव वर्मा और कपिल दुग्गल ने पैरवी की। उन्होंने कोर्ट को बताया कि भोपाल कलेक्टर ने जानबूझकर हाजिरी से बचने की कोशिश की है। कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया।
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