मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण का मुद्दा फिर चर्चा में
तेलंगाना की कांग्रेस सरकार ने ओबीसी आरक्षण को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। इसके बाद मध्य प्रदेश में भी ओबीसी आरक्षण का मुद्दा फिर से चर्चा में आ गया है। मध्य प्रदेश के पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से ओबीसी आरक्षण को लेकर एक बड़ी मांग की है।

तेलंगाना सरकार का फैसला
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने विधानसभा में ऐलान किया कि उनकी सरकार राज्य में ओबीसी आरक्षण की सीमा 23% से बढ़ाकर 42% करने जा रही है। अगर यह कानून लागू होता है, तो तेलंगाना में आरक्षण की कुल सीमा 62% हो जाएगी। यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई 50% की आरक्षण सीमा से अधिक होगा, जो एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
अरुण यादव की मांग
पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने तेलंगाना सरकार के इस फैसले की सराहना करते हुए कहा कि यह सामाजिक न्याय की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से मांग की कि वे प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को 27% करने का तत्काल फैसला लें। अरुण यादव ने कहा, “मैं अखिल भारतीय ओबीसी समाज, मध्य प्रदेश ओबीसी और मध्य प्रदेश यादव समाज की ओर से तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को धन्यवाद देता हूं। साथ ही, मैं मध्य प्रदेश के सीएम से यह मांग करता हूं कि वे प्रदेश में 27% आरक्षण को तुरंत लागू करें।”
मध्य प्रदेश और तेलंगाना में ओबीसी आबादी
दोनों राज्यों में ओबीसी समुदाय की आबादी सबसे अधिक है। तेलंगाना में हाल ही में हुए जाति सर्वेक्षण के मुताबिक, राज्य की कुल आबादी में पिछड़ी जातियों (ओबीसी) का समूह सबसे बड़ा है। इसी आधार पर तेलंगाना सरकार ने ओबीसी आरक्षण बढ़ाने का फैसला लिया है।
मध्य प्रदेश में भी ओबीसी को 27% आरक्षण की व्यवस्था है, लेकिन यह मामला हाईकोर्ट में अटका हुआ है। इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस भी जारी है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों दल यह दावा करते रहे हैं कि उनकी सरकारों ने ओबीसी को 27% आरक्षण देने का काम किया है।
राजनीतिक महत्व
तेलंगाना के फैसले के बाद मध्य प्रदेश में भी ओबीसी आरक्षण का मुद्दा गर्मा गया है। अरुण यादव की मांग ने इस मुद्दे को और हवा दी है। ओबीसी समुदाय की बड़ी आबादी को देखते हुए यह मुद्दा राजनीतिक दलों के लिए अहम हो गया है।
निष्कर्ष
तेलंगाना सरकार के फैसले ने ओबीसी आरक्षण के मुद्दे को देशभर में चर्चा में ला दिया है। मध्य प्रदेश में भी इस मुद्दे पर सियासी बहस तेज हो गई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव इस मांग पर क्या कदम उठाते हैं।




