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कुशीनगर: 5 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ हैवानियत, FIR दर्ज करने में पुलिस की आनाकानी

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Kushinagar: Brutality with a 5-year-old innocent girl

रिपोर्ट- संदीप जायसवाल

  • मिठाई दिलाने के बहाने घर से ले गया आरोपी
  • पड़ोस के ही 22 वर्षीय युवक ने दिया घटना को अंजाम
  • घटना के बाद नग्न अवस्था में छोड़कर मौके से फरार हुआ आरोपी
  • मामले में मौके पर पहुँची पुलिस ने मासूम का इलाज कराने के बजाय खानापूर्ति कर चली गयी, पुलिस परिजनों ने लगाया आरोप
  • घटना के 20 घंटे बाद भी नही दर्ज हुआ मुकदमा
  • इलाज के लिए तड़प रही है मासूम बच्ची
  • थाने पर परिजन तहरीर लेकर मुकदमा लिखवाने का कर रहे है इंतजार
  • पुलिस पर तहरीर बदलवाने का परिजन लगा रहे है आरोप
  • सुबह से थाने का चक्कर काट रहे है परिजन
  • कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के एक गाँव का मामला

मासूम बच्चों पर बुरी नजर रखने या उन्हें शिकार बनाने वाले लोग बेहद विकृत मानसिकता के होते हैं। उनकी मानसिक स्थिति में कई गहरे और जटिल मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक कारण हो सकते हैं।

  1. असुरक्षित और विकृत सोच: ऐसे लोग अक्सर मानसिक रूप से असुरक्षित होते हैं और उनका मानसिक विकास ठीक से नहीं हुआ होता। उनमें अपनी भावनाओं और इच्छाओं पर नियंत्रण नहीं होता और वे अपनी विकृत सोच को दूसरों पर थोपते हैं, खासकर बच्चों पर जो शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर होते हैं।
  2. सामाजिक और पारिवारिक असंतुलन: कई बार ऐसे लोग परिवार और समाज से उपेक्षित होते हैं। वे किसी प्रकार की सामाजिक या पारिवारिक असंतुलन का शिकार होते हैं, जिससे उनका मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ जाता है। ऐसे व्यक्तियों को कई बार यह लगता है कि बच्चों के प्रति उनका व्यवहार ‘नॉर्मल’ या ‘स्वीकार्य’ है।
  3. शारीरिक और मानसिक शोषण का इतिहास: कई बार ऐसे लोग खुद बचपन में शारीरिक या मानसिक शोषण का शिकार हो चुके होते हैं, और वे इसे अपनी मानसिक स्थिति को ठीक करने के बजाय बच्चों पर लागू करते हैं। यह एक प्रकार का शोषण चक्र होता है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चलता है।
  4. अविकसित और असंवेदनशील भावनाएं: बच्चों के प्रति ऐसी मानसिकता रखने वाले लोग अक्सर बच्चों की मासूमियत और उनकी भावनाओं को समझने में असमर्थ होते हैं। उनके लिए बच्चों को अपनी इच्छाओं का शिकार बनाना एक बुरा व्यवहार नहीं, बल्कि एक ‘जरूरत’ जैसा लगता है।
  5. मनोवैज्ञानिक विकार: कुछ व्यक्तियों में मानसिक विकार, जैसे कि पेडोफीलिया, मानसिक असंतुलन या अन्य मानसिक रोग होते हैं, जो इस प्रकार के अपराधों को जन्म देते हैं। ये मानसिक विकार व्यक्ति को बच्चों के प्रति असामान्य आकर्षण महसूस कराते हैं।
  6. सोशल मीडिया और इंटरनेट का प्रभाव:
    हालांकि, इंटरनेट पर अपत्तिजनक सामग्री, जैसे कि पेडोफिलिया, हिंसा, या आपत्तिजनक वीडियो, किशोरों को प्रभावित कर सकती है, लेकिन यह केवल एक बाहरी कारण है। यह मानसिक विकृति को और भी बढ़ावा दे सकता है, लेकिन ऐसे अपराधों के लिए मुख्य रूप से मानसिक स्थिति और व्यक्तिगत अनुभव ही जिम्मेदार होते हैं।

इस प्रकार के मानसिक विकृतियों से जूझ रहे लोगों को सही मानसिक इलाज, सहायता और पुनर्वास की जरूरत होती है। ऐसे अपराधों को रोकने के लिए समाज को जागरूक और संवेदनशील बनाना बेहद जरूरी है, ताकि बच्चों को सुरक्षित वातावरण मिल सके और इस प्रकार के अपराधों से बचा जा सके।

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