रिपोर्ट- चंदन वर्मा, योगानंद श्रीवास्तव
उत्तर प्रदेश: संभल जिले में स्थित शाही जामा मस्जिद में सफेदी कराने की अनुमति मिल गई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आदेश दिया है कि मस्जिद के जिन हिस्सों में सफेदी की आवश्यकता है, वहां भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) यह कार्य पूरा करेगा। कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह कार्य एक सप्ताह के भीतर पूरा किया जाए और इसका पूरा खर्च मस्जिद कमेटी द्वारा उठाया जाएगा।
पुताई और लाइट लगाने का आदेश
संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने एएसआई को मस्जिद की बाहरी दीवारों की सफेदी और सजावटी लाइट लगाने का निर्देश दिया। इससे पहले, कोर्ट ने एएसआई से यह स्पष्ट करने को कहा था कि वह मस्जिद की बाहरी दीवार की पुताई को लेकर कोई आपत्ति क्यों रखता है।
मस्जिद कमेटी के वरिष्ठ अधिवक्ता एस.एफ.ए. नकवी ने कोर्ट में दलील दी कि एएसआई द्वारा प्रस्तुत हलफनामे में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि मस्जिद की बाहरी दीवार की पुताई और सजावट को अनुमति क्यों नहीं दी जा रही थी। उन्होंने मस्जिद की दीवारों की रंगीन तस्वीरें भी पेश कीं, जिससे यह प्रमाणित हुआ कि सफेदी की आवश्यकता है।
रमजान से पहले सफाई और सजावट की मांग
रमजान के मद्देनजर, मस्जिद प्रबंधन समिति ने मस्जिद की सफाई, पेंटिंग और सजावट की अनुमति के लिए एएसआई को आवेदन दिया था। साथ ही, इलाहाबाद हाई कोर्ट में भी इस संबंध में याचिका दायर की गई थी, जिस पर कोर्ट ने अब फैसला सुनाया है।
मस्जिद कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट के उन आदेशों का हवाला दिया, जिनमें धार्मिक स्थलों की सफाई और सजावट पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। पहले मस्जिद समिति ने एएसआई को पत्र लिखकर सफेदी और सजावट की अनुमति मांगी थी, लेकिन जब कोई ठोस जवाब नहीं मिला, तो उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर की।
24 नवंबर की हिंसा के बाद एहतियात
मस्जिद समिति के अध्यक्ष जफर अली ने बताया कि ऐतिहासिक रूप से मस्जिद की सफाई और सजावट बिना किसी विवाद के होती रही है। लेकिन पिछले वर्ष 24 नवंबर को हुई हिंसा के बाद, समिति को लगा कि बिना अनुमति कार्य कराने से विवाद हो सकता है। इसी कारण, समिति ने पहले एएसआई से मंजूरी मांगी और फिर कानूनी प्रक्रिया अपनाई।





