दिल्ली: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को नए आयकर विधेयक को मंजूरी दी है, जो 1961 के आयकर अधिनियम को प्रतिस्थापित करने के लिए तैयार है। यह निर्णय 2024 के केंद्रीय बजट के बाद लिया गया था।
नया आयकर विधेयक 2025: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को घोषणा की कि नया आयकर विधेयक अगले सप्ताह संसद में प्रस्तुत किया जाएगा, जिसके बाद इसे एक संसदीय समिति द्वारा समीक्षा की जाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और सरकार विभिन्न आर्थिक मुद्दों पर करीबी सहयोग करेंगे, जिनमें मुद्रास्फीति और विकास शामिल हैं। वह RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा और वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के साथ थीं। यह बयान RBI की मौद्रिक नीति समिति द्वारा हाल ही में की गई रेपो दर में कटौती के बाद दिया गया था।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को नए आयकर विधेयक को मंजूरी दी है, जो 1961 के आयकर अधिनियम की जगह लेगा। आयकर अधिनियम की समीक्षा की घोषणा जुलाई में 2024 के केंद्रीय बजट के बाद की गई थी।
विधेयक का उद्देश्य
इस विधेयक का उद्देश्य आयकर कानूनों को सरल बनाना है, ताकि वे और अधिक संक्षिप्त और समझने में आसान हों। विधेयक का प्रमुख उद्देश्य कानूनी शब्दावली को सरल बनाना है, ताकि करदाताओं के लिए प्रावधानों को समझना आसान हो। इससे उम्मीद की जा रही है कि विवादों और मुकदमेबाजी में कमी आएगी, और करदाताओं को कर में अधिक स्पष्टता प्राप्त होगी।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2025 को अपने बजट भाषण में कहा, “हमारी सरकार ने पहले भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita) की शुरुआत की थी, जिसने भारतीय दंड संहिता (Bharatiya Danda Sanhita) की जगह ली। मैं खुशी के साथ सूचित करती हूं कि नया आयकर विधेयक उसी न्याय की भावना को आगे बढ़ाएगा। यह विधेयक स्पष्ट और सीधे शब्दों में होगा, इसके अध्यायों और शब्दों की संख्या वर्तमान कानून के लगभग आधे होगी। यह करदाताओं और कर प्रशासन दोनों के लिए समझने में आसान होगा, जिससे कर में स्पष्टता आएगी और मुकदमेबाजी कम होगी।”
नए आयकर विधेयक में क्या बदलाव होंगे?
नए आयकर विधेयक के द्वारा करदाता को तुरंत आयकर राहत मिल सकेगी, और अब बजट अपडेट्स या आयकर अधिनियम में संशोधन पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होगी। इसके अतिरिक्त, इसमें ऐसी धाराओं के बारे में भी चर्चाएं हो रही हैं, जो सरकार को कार्यकारी आदेशों के माध्यम से कटौती और छूट की सीमा बदलने का अधिकार दे सकती हैं।
नए विधेयक के प्रमुख बदलाव:
- सरलीकृत निवास नियम: निवास की स्थिति निर्धारण के नियमों को सरल बनाने की संभावना है।
- सरलीकृत कर संरचना: इस विधेयक में मौजूदा कानून की तुलना में लगभग आधे प्रावधान होंगे।
- अनुपालन की सुविधा: यह विधेयक करदाताओं और आयकर अधिकारियों दोनों के लिए अनुपालन को सरल बनाने की दिशा में काम करेगा।
नए आयकर विधेयक के फायदे
मौजूदा आयकर अधिनियम को अक्सर अत्यधिक विस्तृत और जटिल माना जाता है, जिसके कारण करदाताओं के लिए इसे समझना कठिन हो जाता है। अधिकांश व्यक्तियों को आयकर नियमों को समझने और पालन करने के लिए कर पेशेवरों या चार्टर्ड एकाउंटेंट्स से मार्गदर्शन लेना पड़ता है ताकि वे कानूनी समस्याओं से बच सकें।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने आयकर अधिनियम का मूल्यांकन करने के लिए एक समिति स्थापित की है। सामान्य नागरिकों से भी आयकर पोर्टल के माध्यम से कानून में संभावित बदलावों पर सुझाव प्राप्त किए जा रहे हैं। इस समीक्षा के तहत आयकर अधिनियम को सरल बनाने का उद्देश्य है, ताकि यह करदाताओं के लिए अधिक सुलभ हो सके।
मंडरा ने कहा, “आयकर अधिनियम को सरल बनाने का उद्देश्य यह है कि यह करदाताओं के लिए आसानी से समझने योग्य हो।”
मुख्य बदलाव:
- जटिलता में कमी: नया आयकर विधेयक कर संरचना को सरल बनाएगा और करदाताओं के लिए कटौतियों और छूट की संख्या को कम करेगा।
- बढ़ी हुई अनुपालन दर: यह कर कानूनों को सुव्यवस्थित करेगा और कानूनी अस्पष्टताओं को कम करेगा।
- एकीकृत कर दरें: इसमें कर दरों को वैश्विक मानकों के अनुरूप समायोजित किया जाएगा, जिससे भारत घरेलू और विदेशी व्यापारों के लिए अधिक आकर्षक बनेगा।
- कानूनी विवादों में कमी: कर कानूनों को सरल बनाने से व्यक्तियों और व्यापारों के लिए मुकदमेबाजी में महत्वपूर्ण कमी आने की संभावना है।
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