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ASARAM DOCUMENTARY: आसाराम के समर्थक हुए नाराज़, मेकर्स को धमकाया

ASARAM DOCUMENTARY: Asaram's supporters got angry, threatened the makers

नई दिल्ली। आसाराम के जिस ‘कल्ट ऑफ फियर’ की कहानी डिस्कवरी ने लोगों को दिखाई, उस कहानी को कर्मचारी खुद महसूस कर रहे हैं। आसाराम समर्थकों के आतंक के चलते ओटीटी प्लेटफॉर्म डिस्कवरी प्लस के कर्मचारी खौफ में हैं। खौफ भी ऐसा कि 100 से ज्यादा कर्मचारी दफ्तर नहीं आ रहे हैं और घरों में कैद होकर जिंदगी जीने को मजबूर हैं। डिस्कवरी ने डॉक्यूमेंट्री सीरीज ‘कल्ट ऑफ फियर: आसाराम बापू’ बनाई है। इसके रिलीज होने के बाद से ही चैनल के कर्मचारियों को धमकियां मिल रही हैं। इसके बाद कंपनी ने पुलिस में शिकायत की, मगर कार्रवाई नहीं होने पर हारकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची। कंपनी द्वारा दिए गए कागजात बताते हैं कि आसाराम समर्थक फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रुकवाने के लिए कई हथकंडे अपना रहे हैं। डिस्कवरी कम्युनिकेशंस इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि उनके कर्मचारियों का जीना दूभर हो गया है। सुनवाई में सीजेआई संजीव खन्ना की बेंच ने कर्नाटक, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, हरियाणा, तेलंगाना और तमिलनाडु की पुलिस को कर्मचारियों अंतरिम सुरक्षा देने का आदेश दिया है। डिस्कवरी इंडिया ने अपने कर्मचारियों से कहा है कि वे ऑफिस के बाहर कंपनी का आईडी कार्ड के साथ नहीं दिखे। अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर बायो से कुछ समय के लिए कंपनी का नाम हटा दें। सार्वजनिक जगहों पर आसाराम या कंपनी के बारे में चर्चा से बचे। सोशल मीडिया पर कंपनी संबंधी भद्दे कमेंट पर प्रतिक्रिया न दें। धरने और रैली की जगह जाने से परहेज करें। आपात स्थिति में कंपनी के हेल्पलाइन नंबर पर फोन करें। दरअसल डॉक्यूमेंट्री रिलीज होने के एक दिन बाद 30 जनवरी को आसाराम समर्थक मुंबई-पुणे स्थित ऑफिस में घुसने लगे और तोड़-फोड़ कर डॉक्यूमेंट्री हटाने की धमकी दी। उसी दिन हैदराबाद, बेंगलुरु और कोलकाता के ऑफिस को भी पत्रों व ई-मेल के जरिये धमकियां दी गईं। 1 फरवरी को दिल्ली व गुरुग्राम के कर्मचारियों को धमकियां दीं।इतना ही नहीं आसाराम समर्थकों ने महिला कर्मचारियों को रास्ते में रोक कर गालियां दीं। समर्थकों ने कहा, ‘तुमने आसाराम बाबा पर दुष्कर्म का आरोप लगाया है। तुम्हें पता भी है दुष्कर्म कैसे होता है। खौफ से महिलाओं ने खुद को घरों में बंद किया। वहीं मुंबई के कर्मचारियों का पीछा करते हुए समर्थक उनके घर पहुंच गए। धमकाया कि वे दबाव डालकर डॉक्यूमेंट्री हटवाएं। मुंबई-पुणे के बहुत से कर्मचारियों ने घर से निकलना बंद कर दिया।

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