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SC on Delhi Protest : दिल्ली में प्रदर्शन के बीच सुप्रीम कोर्ट का आदेश, तुरंत हटाएं बैरिकेड्स, मेट्रो-इंटरनेट सेवा भी करें बहाल

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by: vijay yadav

SC on Delhi Protest : नई दिल्ली, दिल्ली में 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई, हिरासत और आम लोगों की आवाजाही से जुड़े मुद्दे रविवार को सुप्रीम कोर्ट में उठाए गए। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने निर्देश दिया कि जब तक बेहद जरूरी न हो, दिल्ली में लगाए गए बैरिकेड्स हटा दिए जाने चाहिए। कोर्ट ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ नागरिकों की स्वतंत्र आवाजाही सामान्य करने पर भी जोर दिया।

SC on Delhi Protest : बैरिकेडिंग और पुलिस कार्रवाई पर सुनवाई

प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई थीं। इन्हीं मामलों पर सुनवाई के दौरान अदालत ने बैरिकेडिंग को लेकर निर्देश दिए।

अदालत की टिप्पणी का मुख्य उद्देश्य यह था कि सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर आम नागरिकों की आवाजाही अनावश्यक रूप से बाधित नहीं होनी चाहिए। हालांकि, कानून-व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को देखते हुए जरूरी सुरक्षा उपाय किए जा सकते हैं।

SC on Delhi Protest : नागरिकों को प्रदर्शन का अधिकार, लेकिन कानून के दायरे में

सुनवाई के दौरान जस्टिस जयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि नागरिकों को विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन प्रदर्शन निर्धारित कानूनी नियमों के अनुसार होना चाहिए।

अदालत ने स्पष्ट किया कि विरोध का अधिकार महत्वपूर्ण है, मगर इसके इस्तेमाल में कानून का पालन करना भी जरूरी है। इस टिप्पणी के साथ प्रदर्शनकारियों के अधिकारों और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया गया।

SC on Delhi Protest : किस याचिका पर हुई सुनवाई?

रिपोर्ट के मुताबिक, यह सुनवाई अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दायर अवमानना याचिका के संदर्भ में हुई। याचिका में 9 अक्टूबर को दिए गए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लेख किया गया था। इससे पहले प्रदर्शन के मद्देनजर मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने और दिल्ली आने वाली ट्रेनों के संचालन पर असर पड़ने से जुड़े मुद्दे भी अदालत के सामने उठाए गए थे।

SC on Delhi Protest : कपिल सिब्बल ने हिरासत और इंटरनेट बंद करने पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू करने पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस लोगों को ट्रेनों से उतारकर हिरासत में ले रही है।

सिब्बल ने इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध का मुद्दा भी उठाया और इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के अनुराधा भसीन फैसले का हवाला दिया।

SC on Delhi Protest : प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार का मुद्दा भी उठा

वरिष्ठ अधिवक्ता शदान फरासत ने प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला अदालत के सामने रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ प्रदर्शनकारियों को घसीटकर बसों में बैठाया गया और उनके साथ अनुचित व्यवहार किया गया। उन्होंने छात्रों और बच्चों के साथ कथित मारपीट का मुद्दा भी उठाया।

वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने दलील दी कि मौजूदा हालात में लोगों की स्वतंत्र आवाजाही प्रभावित हो रही है।

SC on Delhi Protest : आम लोगों के लिए क्या मायने हैं?

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और नागरिकों की आवाजाही के बीच संतुलन का सवाल फिर चर्चा में आ गया है। अदालत ने जरूरी सुरक्षा उपायों की गुंजाइश रखते हुए अनावश्यक बैरिकेडिंग हटाने पर जोर दिया है। इस मामले में पुलिस कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों के अधिकारों और सार्वजनिक परिवहन पर पड़े असर को लेकर आगे की न्यायिक कार्यवाही महत्वपूर्ण रहेगी।

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