Hasya Hathoda Google : आज के जमाने में डॉक्टर के पास जाने से पहले लोग एक जगह जरूर जाते हैं, वो जगह है Google बाबा के दरबार में, सिर दर्द हो तो Google, पेट दर्द हो तो Google, नींद न आए तो Google और कभी-कभी तो पड़ोसी के खर्राटों का इलाज भी Google से ही पूछा जाता है।
पहले जमाने में घर में दादी-नानी होती थीं। बीमारी हुई तो तुलसी, अदरक, हल्दी और काढ़ा हाजिर। अब दादी की जगह स्मार्टफोन ने ले ली है। बस अंतर इतना है कि दादी कहती थीं, बेटा.. आराम कर, जबकि Google बाबा बीमारी की ऐसी लंबी सूची खोल देते हैं कि मरीज आराम करने की जगह अपनी कुंडली ढूंढने लगता है।
सुबह उठे और गला थोड़ा खराब लगा। Google पर लिखा, गले में दर्द क्यों?
जवाब आया, सर्दी से लेकर ऐसी-ऐसी गंभीर बीमारियों तक की सूची, जिन्हें पढ़कर गला ठीक हो या न हो, दिल जरूर बैठ जाता है।

Hasya Hathoda Google : फिर दूसरा सवाल, क्या यह कैंसर का लक्षण है?
अब Google बाबा भी क्या करें! आपने पूछा तो उन्होंने इंटरनेट की पूरी दुकान खोल दी। एक तरफ मामूली कारण, दूसरी तरफ गंभीर बीमारी। मरीज बीच में बैठकर सोचता है, डॉक्टर के पास जाऊं या पहले अपनी रिपोर्ट खुद ही लिख दूं?
Hasya Hathoda Google : सबसे मजेदार बात यह है कि Google पर बीमारी खोजने वाला व्यक्ति अक्सर इलाज भी खुद ही तय कर लेता है।
मुझे विटामिन की कमी है।
आपको कैसे पता?
Google ने बताया है।
डॉक्टर को दिखाया?
नहीं, लेकिन Google और यू-ट्यूब पर तीन वीडियो देख लिए हैं।
Hasya Hathoda Google : बस, यही आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था का नया मॉडल है, डिग्री डॉक्टर की, रिसर्च मरीज की और फैसला Google बाबा का।
कई लोग दवा भी इंटरनेट देखकर बदल लेते हैं। किसी ने बताया कि सुबह खाली पेट कुछ खा लीजिए, किसी ने कहा कुछ मत खाइए, तीसरे ने बताया कि रात में पानी पीना भी खतरनाक है। चौथे वीडियो में कोई बाबा कह रहे हैं कि हर बीमारी का इलाज एक ही चीज से संभव है।
Hasya Hathoda Google : अब मरीज सोच रहा है, मैं बीमार हूं या इंटरनेट की प्रयोगशाला का चूहा ?
मामला सिर्फ बीमारी तक सीमित नहीं है। इंटरनेट ने हर घर में एक-एक विशेषज्ञ पैदा कर दिया है। कोई डॉक्टर को सलाह दे रहा है, कोई इंजीनियर को, कोई वकील को और कोई मौसम विभाग को।
सबसे खतरनाक स्थिति तब होती है जब इंटरनेट पर मिली जानकारी को अंतिम सत्य मान लिया जाता है। स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी उपयोगी हो सकती हैं, लेकिन हर व्यक्ति की उम्र, बीमारी, दवा, एलर्जी और मेडिकल हिस्ट्री अलग होती है। जो सलाह किसी एक व्यक्ति के लिए ठीक हो, जरूरी नहीं कि दूसरे के लिए भी सही हो।
इसलिए Google बाबा से जानकारी जरूर लीजिए, लेकिन निदान की जिम्मेदारी उन्हें मत दीजिए।
Google आपको संभावनाएं बता सकता है, डॉक्टर आपकी स्थिति देखकर बीमारी समझ सकता है। Google रिपोर्ट पढ़ सकता है, लेकिन मरीज को देखकर उसकी पूरी कहानी नहीं समझ सकता।
तो अगली बार सिर दर्द हो और हाथ मोबाइल की तरफ जाए तो थोड़ा रुकिए। Google खोलने से पहले पानी पीजिए, आराम कीजिए और जरूरत लगे तो डॉक्टर से सलाह लीजिए।
Hasya Hathoda Google : क्योंकि Google बाबा ज्ञान के भंडार हैं, लेकिन डॉक्टर नहीं।
और हां… अगर यह हास्य व्यंग पढ़कर आपको लगे कि आपको कोई बीमारी है, तो कृपया इस लेख को भी Google पर खोजकर उसका इलाज मत शुरू कर दीजिए!
हास्य हथौड़ा की आज की चोट बस इतनी है
इंटरनेट से जानकारी लीजिए, बीमारी की डिग्री नहीं!


