Kota Pregnant Women Case में चार कमेटियों ने की जांच
राजस्थान के कोटा मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत और किडनी फेल्योर के चर्चित मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। मामले की जांच के लिए गठित चार अलग-अलग उच्चस्तरीय कमेटियों ने अपनी रिपोर्ट में निलंबित किए गए तीनों डॉक्टरों को क्लीनचिट दी है। जांच के मुताबिक डॉक्टरों की ओर से व्यक्तिगत चिकित्सकीय लापरवाही नहीं पाई गई। रिपोर्ट सामने आने के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग ने तीनों डॉक्टरों का निलंबन समाप्त कर दिया है।
Kota Pregnant Women Case के बाद तीन डॉक्टर किए गए थे निलंबित
कोटा मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में मई 2026 में सीजेरियन डिलीवरी के बाद कुछ प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने और किडनी फेल्योर के मामले सामने आए थे। इसके बाद जेके लोन अस्पताल में भी इसी तरह की चिकित्सकीय जटिलताओं का मामला सामने आया। घटनाक्रम के बाद कई महिलाओं की मौत हुई, जिसके चलते अस्पताल की व्यवस्थाओं और इलाज की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे थे।
सरकार ने 9 मई 2026 को कार्रवाई करते हुए कोटा मेडिकल कॉलेज के तीन डॉक्टरों को निलंबित किया था। इनमें गायनी विभाग के प्रोफेसर डॉ. बीएल पाटीदार, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. खुशबू मीणा और सर्जरी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नवनीत कुमार शामिल थे।
Kota Pregnant Women Case में चार उच्चस्तरीय कमेटियों ने की पड़ताल
घटनाक्रम की गंभीरता को देखते हुए अलग-अलग स्तर पर जांच कमेटियां गठित की गई थीं। रिपोर्ट के मुताबिक कोटा, जयपुर, जोधपुर और दिल्ली से जुड़ी चार कमेटियों ने मामले की जांच की। जांच में इलाज की प्रक्रिया, दवाओं, संक्रमण के संभावित स्रोतों और मरीजों की केस हिस्ट्री सहित विभिन्न पहलुओं की तकनीकी पड़ताल की गई।
Kota Pregnant Women Case में डॉक्टरों को मिली क्लीनचिट
जांच कमेटियों की रिपोर्ट में तीनों डॉक्टरों की व्यक्तिगत चिकित्सकीय लापरवाही नहीं पाई गई। रिपोर्ट के अनुसार डॉक्टरों ने निर्धारित चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के तहत उपचार किया था। चारों जांचों के निष्कर्ष सामने आने के बाद तीनों डॉक्टरों को मामले में क्लीनचिट दी गई।
Kota Pregnant Women Case में निलंबन हुआ खत्म
कमेटियों की रिपोर्ट के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग की संयुक्त सचिव डॉ. ज्योति चौहान ने शुक्रवार को तीनों डॉक्टरों की बहाली के आदेश जारी किए। निलंबन समाप्त होने के बाद तीनों को दोबारा कोटा मेडिकल कॉलेज में पदस्थापित किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार डॉक्टर शनिवार से दोबारा ड्यूटी ज्वाइन करेंगे।
Kota Pregnant Women Case में कितनी महिलाओं पर पड़ा असर
मई में सामने आए इस घटनाक्रम में कई प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने और किडनी से जुड़ी गंभीर समस्याओं की जानकारी सामने आई थी। शुरुआती तौर पर न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सीजेरियन डिलीवरी के बाद छह महिलाओं में गंभीर जटिलताएं सामने आई थीं। बाद में जेके लोन अस्पताल समेत अन्य मामलों को लेकर भी स्थिति की जांच की गई।
Kota Pregnant Women Case पर पीड़ित परिवारों ने उठाए सवाल
जांच कमेटियों की रिपोर्ट में डॉक्टरों को क्लीनचिट मिलने के बाद भी मामले से प्रभावित परिवारों की ओर से जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग सामने आई है। एक पीड़ित परिवार ने सवाल उठाया है कि यदि डॉक्टरों की व्यक्तिगत लापरवाही नहीं थी तो प्रसूताओं की मौत और किडनी संबंधी गंभीर समस्याओं के पीछे वास्तविक कारण क्या थे। यह पक्ष जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही विस्तार से स्पष्ट हो सकेगा।
Kota Pregnant Women Case में अब आगे क्या होगा
चार उच्चस्तरीय जांच कमेटियों की रिपोर्ट के बाद तीनों निलंबित डॉक्टरों की बहाली हो चुकी है। फिलहाल इस मामले में जांच के निष्कर्षों और प्रभावित परिवारों की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर आगे की स्थिति पर नजर बनी हुई है। चिकित्सा शिक्षा विभाग के आदेश के बाद डॉक्टरों के दोबारा कोटा मेडिकल कॉलेज में कार्यभार संभालने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
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