Yemen: यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ संघर्ष के बीच सऊदी अरब को लेकर एक बड़ा दावा सामने आया है। रिपोर्टों के मुताबिक, हूतियों से निपटने के लिए सऊदी अरब ने इजरायल से कथित तौर पर खुफिया मदद ली है। बताया जा रहा है कि यह सहयोग अमेरिका की मध्यस्थता से इंटेलिजेंस के स्तर पर हुआ। हालांकि, सऊदी अरब की ओर से इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है।
मामले को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सऊदी अरब ने हाल ही में तुर्की और पाकिस्तान के साथ मक्का डिफेंस समझौता किया था। इसके बावजूद यमन में हूतियों के खिलाफ सऊदी समर्थित पक्ष को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में रियाद के सामने अपनी सुरक्षा रणनीति को लेकर नए विकल्पों पर विचार करने की स्थिति बनती दिखाई दे रही है।
Yemen: इजरायल को दिखा सऊदी के करीब आने का मौका
इजरायली चैनल i24NEWS की एक रिपोर्ट में इस पूरे घटनाक्रम को इजरायल के लिए रणनीतिक अवसर के तौर पर पेश किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल में कुछ सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यमन में मौजूदा परिस्थितियां सऊदी अरब को यह सोचने पर मजबूर कर सकती हैं कि मुश्किल समय में उसके लिए कौन से देश वास्तविक सुरक्षा सहयोग उपलब्ध करा सकते हैं।
चैनल के डिप्लोमैटिक कॉरेस्पोंडेंट गाइ एजरील ने एक सुरक्षा अधिकारी के हवाले से कहा कि हालिया घटनाओं से तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के डिफेंस पैक्ट की व्यावहारिक क्षमता पर सवाल उठे हैं। अधिकारी के अनुसार, जमीन पर सामने आई परिस्थितियां इजरायल के लिए सऊदी अरब के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ाने की संभावना पैदा करती हैं।
Yemen: तुर्की और पाकिस्तान पर उठे सवाल
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सऊदी अरब ने तुर्की और पाकिस्तान के साथ मक्का डिफेंस समझौता किया है, लेकिन यमन के मौजूदा संघर्ष में दोनों देशों की प्रत्यक्ष भूमिका सीमित दिखाई दे रही है। इसी वजह से इजरायली विश्लेषकों का मानना है कि सऊदी अरब अपने सुरक्षा विकल्पों पर दोबारा विचार कर सकता है।
इजरायली सुरक्षा अधिकारी ने कथित तौर पर कहा कि सऊदी अरब ने मदद की जरूरत महसूस की और इजरायल के पास उसकी मदद करने की क्षमता थी। उनके मुताबिक, इस घटनाक्रम से रियाद को यह समझने का अवसर मिल सकता है कि संकट के समय कौन से देश उसके साथ खड़े हो सकते हैं।
Yemen: हूतियों ने सऊदी समर्थित सरकार को दिया झटका
यमन में पिछले कुछ समय से हूती विद्रोहियों की गतिविधियां सऊदी अरब के लिए चिंता का कारण बनी हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, हूतियों ने यमन के लाल सागर तट से जुड़े इलाकों में अपनी स्थिति मजबूत की है और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास उनका प्रभाव भी चिंता बढ़ा रहा है।
बाब अल-मंदेब बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए रणनीतिक महत्व रखता है। इस क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने से सऊदी अरब की सुरक्षा के साथ-साथ समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े हितों पर भी असर पड़ सकता है।
Yemen: अमेरिका की मध्यस्थता से खुफिया सहयोग का दावा
सामने आई रिपोर्टों में कहा गया है कि सऊदी अरब और इजरायल के बीच कथित इंटेलिजेंस सहयोग अमेरिका की मध्यस्थता से हुआ। यदि यह दावा सही है तो यह पश्चिम एशिया की बदलती रणनीतिक तस्वीर में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा सकता है।
हालांकि, इस कथित सहयोग की प्रकृति, उपलब्ध कराई गई खुफिया जानकारी और उसके इस्तेमाल को लेकर सार्वजनिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सऊदी सरकार ने अभी तक इजरायल से खुफिया मदद लेने की बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
Yemen: क्या अब्राहम समझौते की दिशा में बढ़ सकता है मामला?
इजरायली पक्ष से इस घटनाक्रम को सऊदी अरब के साथ भविष्य में संबंधों को आगे बढ़ाने की संभावना से भी जोड़कर देखा जा रहा है। रिपोर्ट में एक सुरक्षा अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि सऊदी अरब और इजरायल के बीच साझा सुरक्षा हित दोनों देशों को करीब ला सकते हैं।
इजरायल और कई अरब देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की प्रक्रिया को अब्राहम समझौते के तहत आगे बढ़ाया गया था। ऐसे में सऊदी अरब के साथ सुरक्षा और खुफिया स्तर पर किसी भी तरह का सहयोग भविष्य की कूटनीतिक बातचीत के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, मौजूदा रिपोर्टों के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि इससे कोई औपचारिक समझौता होने जा रहा है।
Yemen: सऊदी अरब के सामने सुरक्षा रणनीति का सवाल
यमन में हूतियों की स्थिति और लाल सागर क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर सऊदी अरब के सामने चुनौती बनी हुई है। एक तरफ उसके पास तुर्की और पाकिस्तान के साथ हुआ मक्का डिफेंस समझौता है, वहीं दूसरी ओर इजरायल के साथ कथित खुफिया सहयोग की खबर सामने आई है।
इजरायली विशेषज्ञों की ओर से इसे सऊदी अरब के सामने इजरायल की सुरक्षा क्षमताओं को प्रदर्शित करने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल यह घटनाक्रम रिपोर्टों और सुरक्षा सूत्रों के दावों पर आधारित है और सऊदी अरब की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
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